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देवी उपासना📜 दुर्गा सप्तशती पाठ नियम, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

दुर्गा सप्तशती का पाठ किस आसन पर बैठकर करें

संक्षिप्त उत्तर

सप्तशती आसन: ऊनी (लाल ऊन — सर्वोत्तम) > कुश आसन > रेशमी > कम्बल > लकड़ी पटा। लाल रंग देवी पूजा में शुभ। नंगी भूमि/गन्दा/दूसरे का आसन वर्जित। पूर्व/उत्तर मुख, एक स्थान पर, बीच में न उठें, शुद्ध वस्त्र।

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विस्तृत उत्तर

दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए आसन का विशेष महत्व है।

उत्तम आसन (क्रम में)

  1. 1ऊनी (ऊन का) आसन — सर्वोत्तम। लाल ऊनी कम्बल या चादर।
  2. 2कुश आसन — कुश (दर्भ) घास से बना। अत्यन्त पवित्र।
  3. 3रेशमी आसन — रेशम का कपड़ा।
  4. 4कम्बल — शुद्ध ऊन का।
  5. 5लकड़ी का पटा (बाजोट/चौकी)।

लाल रंग का आसन देवी पूजा में विशेष शुभ।

वर्जित आसन

  • नंगी भूमि पर न बैठें (बिना आसन)।
  • फटा/गन्दा आसन।
  • दूसरे का प्रयुक्त आसन (आदर्श: अपना विशिष्ट आसन हो)।

अन्य नियम

  • पूर्व या उत्तर दिशा में मुख।
  • एक ही स्थान पर प्रतिदिन बैठें (अनुष्ठान में)।
  • पाठ आरम्भ करने पर बीच में न उठें।
  • शुद्ध वस्त्र, स्नान के बाद।
  • मौन रहें (पाठ के अतिरिक्त न बोलें — कुछ परम्पराओं में)।
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शास्त्रीय स्रोत
दुर्गा सप्तशती पाठ नियम, तंत्र शास्त्र
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