ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

आसन प्रश्नोत्तरी — 38 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित आसन विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 38 प्रश्न

मंत्र विधि

मंत्र जप में दिशा और आसन का चयन कैसे करें?

दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।

दिशाआसनचयन
मंत्र जप नियम

मंत्र जप में रेशमी आसन का प्रयोग कब करें?

देवी साधना (लक्ष्मी/दुर्गा/ललिता), विशेष अनुष्ठान, श्री विद्या। ऊर्जा कुचालक, सात्विक। लाल/गुलाबी। क्रम: कुश>मृगछाला>ऊनी>रेशमी>कपास। अहिंसा प्रश्न → विकल्प: ऊनी।

रेशमीआसनकब
जप नियम

बिना आसन के मंत्र जप का फल

बिना आसन के नंगी जमीन पर बैठकर जप करने से पृथ्वी सारी आध्यात्मिक ऊर्जा सोख लेती है, जिससे जप निष्फल हो जाता है। ऊर्जा संरक्षण के लिए कुशा या ऊनी आसन अनिवार्य है।

आसनऊर्जा नाशनिष्फल जप
ऊर्जा संरक्षण

मंत्र की ऊर्जा को शरीर में कैसे रखें

कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें, जप के बाद आसन के नीचे जल गिराकर मस्तक पर लगाएं और अंत में सारा जप ईश्वर को अर्पित कर दें ताकि ऊर्जा बिखरने न पाए।

ऊर्जा संरक्षणजप नियमआसन
योग

सूर्य नमस्कार 12 मंत्र कौन से?

12 मंत्र: मित्राय, रवये, सूर्याय, भानवे, खगाय, पूष्णे, हिरण्यगर्भाय, मरीचये, आदित्याय, सवित्रे, अर्काय, भास्कराय — नमः। 12 आसन=पूर्ण शरीर। प्रतिदिन 12 चक्र।

सूर्य नमस्कार12 मंत्रआसन
देवी पूजा नियम

देवी मंत्र जप में लाल वस्त्र और लाल आसन क्यों आवश्यक हैं?

लाल = शक्ति/रक्त/जीवन = देवी। कुंकुम/सिंदूर प्रिय। मूलाधार चक्र = लाल (कुंडलिनी)। ऊर्जा resonance। तंत्र: लाल आसन = शक्ति संग्रह। अपवाद: काली=काला, सरस्वती=सफेद।

लालवस्त्रआसन
तंत्र साधना

तंत्र में वीरभद्रासन और शवासन का क्या उपयोग है?

शवासन: मृतक भाव (शरीर अहंकार त्याग), भूत शुद्धि, योग निद्रा, ऊर्जा एकीकरण। वीरभद्रासन: शिव रौद्र, शक्ति जागरण, भय नाश, 'वीर' श्रेणी (कुलार्णव)। सिद्धासन: कुंडलिनी।

वीरभद्रासनशवासनतंत्र
योग अभ्यास

योग में बैठने और दृष्टि रखने का तरीका क्या बताया गया है?

योगी को दृढ़ आसन लगाकर मुख बंद, सिर ऊँचा, दाँत अलग, दृष्टि रोककर उन्मीलित नेत्रों से नासिकाग्र पर दृष्टि रखनी चाहिए।

आसननासिकाग्र दृष्टिस्वस्तिक आसन
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

अष्टांग योगयमनियम
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?

श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

श्रोतादिशाभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?

वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

वक्ता दिशाआसनभागवत कथा
लोक

नवमी श्राद्ध में श्राद्धकर्ता कैसे बैठे?

कुशा, रेशम या ऊन के आसन पर।

श्राद्ध विधिआसननवमी
साधना विधि

नमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

नमः शिवाय जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।

पूर्व दिशाउत्तर दिशाजप दिशा
पाठ विधि और नियम

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कौन सा आसन प्रयोग करें?

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कुशा या ऊनी आसन प्रयोग करें — पाठ से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

आसनकुशाऊनी आसन
स्तोत्र पाठ विधि और नियम

नीलकंठ स्तोत्र का पाठ किस दिशा में बैठकर करें?

नीलकंठ स्तोत्र पाठ के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

पूर्व दिशाआसनपाठ विधि
स्तोत्र पाठ विधि और नियम

अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए किस दिशा में बैठना चाहिए?

अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध, शांत कमरे में आसन पर बैठना चाहिए।

दिशापूर्व उत्तरआसन
दक्षिणामूर्ति साधना

जप के लिए माला और आसन कौन सा लें?

जप के लिए रुद्राक्ष की माला और ऊनी या रुद्राक्ष का आसन श्रेष्ठ है।

मालाआसनरुद्राक्ष
शिव शाबर मंत्र

शाबर साधना के लिए आसन और जप के क्या निर्देश हैं?

लाल ऊनी आसन, रुद्राक्ष माला और रोजाना 501 या 1100 बार मंत्र का जप करना आवश्यक है।

आसनजप नियमरुद्राक्ष माला
भूतनाथ मंत्र साधना

मंत्र जप के लिए कौन सा आसन और माला श्रेष्ठ है?

ऊनी या कंबल का आसन और रुद्राक्ष की माला इस साधना के लिए अनिवार्य और श्रेष्ठ है।

आसनमालारुद्राक्ष
जप नियम

बिस्तर पर बैठकर मंत्र जप करने के क्या नुकसान और नियम हैं

विशेष सिद्धि के लिए बिस्तर पर जप वर्जित है, लेकिन सामान्य 'नाम जप' किसी भी स्थान या अवस्था में किया जा सकता है।

नियमशुद्धिजप
स्तोत्र एवं पाठ

चालीसा पाठ में बैठने का सही तरीका

आसन (कुशा/ऊन/सूती) पर, पूर्व/उत्तर मुख, सुखासन, रीढ़ सीधी, माला दाहिने हाथ। जमीन/बिस्तर/जूते=वर्जित। भाव > आसन।

चालीसाबैठनाआसन
तंत्र साधना

तंत्र में यंत्र पर बैठकर जप करने का क्या विधान है

यंत्रासन: ताँबे/चाँदी/भोजपत्र यंत्र को आसन में रखकर बैठकर जप। यंत्र ऊर्जा सीधे शरीर में। श्रीयंत्र/देवता यंत्र। प्राण प्रतिष्ठित हो, गुरु आदेश अनिवार्य, अशुद्ध अवस्था वर्जित। वैकल्पिक: यंत्र सामने रखकर ध्यान + जप। उन्नत साधना — सामान्य भक्तों हेतु नहीं।

यंत्रआसनजप
देवी उपासना

दुर्गा सप्तशती का पाठ किस आसन पर बैठकर करें

सप्तशती आसन: ऊनी (लाल ऊन — सर्वोत्तम) > कुश आसन > रेशमी > कम्बल > लकड़ी पटा। लाल रंग देवी पूजा में शुभ। नंगी भूमि/गन्दा/दूसरे का आसन वर्जित। पूर्व/उत्तर मुख, एक स्थान पर, बीच में न उठें, शुद्ध वस्त्र।

दुर्गा सप्तशतीआसनपाठ
शिव पूजा

शिव की पूजा करते समय किस मुद्रा में बैठना चाहिए?

शिव पूजा आसन: पद्मासन (सर्वश्रेष्ठ), सुखासन (सरल), सिद्धासन, वज्रासन। कुश/ऊनी/रेशमी आसन। रीढ़ सीधी, पूर्व/उत्तर मुख। जमीन कठिन हो तो कुर्सी भी उचित। स्थिरता = एकाग्रता।

पूजा मुद्राआसनसुखासन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।