विस्तृत उत्तर
तंत्र में यंत्र पर बैठकर (यंत्रासन) जप करना एक विशिष्ट और शक्तिशाली साधना पद्धति है।
विधान
1यंत्र आसन क्या है
ताँबे, चाँदी, सोने या भोजपत्र पर उत्कीर्ण यंत्र को आसन के नीचे या ऊपर रखकर उस पर बैठकर जप करना। यंत्र की ऊर्जा सीधे साधक के शरीर में प्रवाहित होती है।
2कौन से यंत्र
- ▸श्रीयंत्र — श्रीविद्या साधना में साधक श्रीयंत्र पर बैठता है।
- ▸देवता विशिष्ट यंत्र — काली यंत्र, दुर्गा यंत्र, गणेश यंत्र आदि।
- ▸सिद्ध यंत्र — गुरु द्वारा प्राण प्रतिष्ठित।
3विधि
- ▸यंत्र को लाल/श्वेत ऊनी वस्त्र में लपेटकर आसन बनाएँ।
- ▸आसन पर बैठकर देवता का ध्यान करें।
- ▸यंत्र सम्बन्धित मंत्र जप।
- ▸मान्यता: यंत्र = देवता का सूक्ष्म शरीर, बैठने से साधक का शरीर यंत्र ऊर्जा से आवेशित।
4सावधानी
- ▸प्राण प्रतिष्ठित यंत्र ही प्रयोग करें।
- ▸गुरु आदेश के बिना न करें — यह उन्नत साधना है।
- ▸यंत्र की नित्य पूजा अनिवार्य — उपेक्षा अशुभ।
- ▸अशुद्ध अवस्था में यंत्र पर न बैठें।
वैकल्पिक
यंत्र को सामने रखकर (बैठे बिना) उसकी ओर दृष्टि लगाकर जप = 'यंत्र ध्यान' — यह अपेक्षाकृत सरल।


