चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) - प्रमाणिक मंत्र
1.1 महा-आवाहन मंत्र (स्रोत: कुब्जिकातन्त्र)
यह मंत्र देवी का आवाहन करने और कार्य-सिद्धि (बाधा निवारण) के लिए है। इसका पाठ 'त्रिकाल' (सुबह, दोपहर, शाम) किया जाना चाहिए।
ॐ अस्य श्री चण्डाक्षी महामंत्रस्य कुब्जिका ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री चण्डाक्षी गुह्यकेश्वरी देवता, मम सर्वारिष्ट-शान्त्यर्थे सर्व-कार्य-सौकर्यार्थे जपे विनियोगः।
ॐ यावत् सन्तिष्ठते तत्स्था नयोपादैर् अनेकधा ।
तावच् चण्डाक्षी बलवत् परिचर्याम् अनेकधा ॥
कुर्वन्ती विविधोपायैः सौकर्यरचनान् बहून् ।
तेजोभाभिः प्रदीप्यन्ते चण्डाक्षीगुणपूरिताः ॥
1.2 रक्षण एवं अमृत-प्राप्ति मंत्र (स्रोत: कुब्जिकातन्त्र)
यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है और इसका प्रयोग 'रक्षा' और 'ऊर्जा' प्राप्ति के लिए किया जाता है।
ॐ यस्मिन्न् अद्रौ स्थिता देवी देदीप्यार्चिर् घनोज्ज्वला ।
तत् प्रदेशं स्थिरं जातम् अन्यद् दग्धं चराचरम् ॥
तावच् चण्डाक्षिणीत्य् अग्रे पश्यत्य् अमिततेजसा ।
विश्वामृतैः पूरयन्ती दिव्यौघगुणलालसा ॥
1.3 नाम-मंत्र (जप हेतु)
यदि साधक माला पर जप करना चाहता है, तो वाराही तन्त्र और गोरक्ष संहिता के आधार पर निम्नलिखित 'नाम-मंत्र' शास्त्र-सम्मत है: