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चण्डाक्षी

चण्डाक्षी: कुब्जिका तंत्र का 'अग्नि जिह्वा' मंत्र

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अंतिम अपडेट: 17 जनवरी 2026
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चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) के प्रमाणिक मंत्र: कुब्जिकातन्त्र के महा-आवाहन, रक्षा-अमृत मंत्र और नाम-जप विधि चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) - प्रमाणिक मंत्र और साधना विधि | Chandaakshi Guhyaka Devi चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) - प्रमाणिक मंत्र 1.1 महा-आवाहन मंत्र (स्रोत: कुब्जिकातन्त्र) यह मंत्र देवी का आवाहन करने और कार्य-सिद्धि (बाधा निवारण) के लिए है। इसका पाठ 'त्रिकाल' (सुबह...

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चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) - प्रमाणिक मंत्र और साधना विधि | Chandaakshi Guhyaka Devi

चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) - प्रमाणिक मंत्र

1.1 महा-आवाहन मंत्र (स्रोत: कुब्जिकातन्त्र)

यह मंत्र देवी का आवाहन करने और कार्य-सिद्धि (बाधा निवारण) के लिए है। इसका पाठ 'त्रिकाल' (सुबह, दोपहर, शाम) किया जाना चाहिए।

विनियोग:
ॐ अस्य श्री चण्डाक्षी महामंत्रस्य कुब्जिका ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री चण्डाक्षी गुह्यकेश्वरी देवता, मम सर्वारिष्ट-शान्त्यर्थे सर्व-कार्य-सौकर्यार्थे जपे विनियोगः।
मंत्र (श्लोक पाठ):

ॐ यावत् सन्तिष्ठते तत्स्था नयोपादैर् अनेकधा ।
तावच् चण्डाक्षी बलवत् परिचर्याम् अनेकधा ॥
कुर्वन्ती विविधोपायैः सौकर्यरचनान् बहून् ।
तेजोभाभिः प्रदीप्यन्ते चण्डाक्षीगुणपूरिताः ॥

1.2 रक्षण एवं अमृत-प्राप्ति मंत्र (स्रोत: कुब्जिकातन्त्र)

यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है और इसका प्रयोग 'रक्षा' और 'ऊर्जा' प्राप्ति के लिए किया जाता है।

मंत्र:

ॐ यस्मिन्न् अद्रौ स्थिता देवी देदीप्यार्चिर् घनोज्ज्वला ।
तत् प्रदेशं स्थिरं जातम् अन्यद् दग्धं चराचरम् ॥
तावच् चण्डाक्षिणीत्य् अग्रे पश्यत्य् अमिततेजसा ।
विश्वामृतैः पूरयन्ती दिव्यौघगुणलालसा ॥

1.3 नाम-मंत्र (जप हेतु)

यदि साधक माला पर जप करना चाहता है, तो वाराही तन्त्र और गोरक्ष संहिता के आधार पर निम्नलिखित 'नाम-मंत्र' शास्त्र-सम्मत है:

मंत्र: ॐ ह्रीं चण्डाक्ष्यै अग्निजिह्वायै नमः ॥
लेख को संदर्भ सहित पढ़ें

चण्डाक्षी: कुब्जिका तंत्र का 'अग्नि जिह्वा' मंत्र पर आगे क्या समझना जरूरी है

चण्डाक्षी: कुब्जिका तंत्र का 'अग्नि जिह्वा' मंत्र के विषय में इस लेख का मूल संकेत यह है: चण्डाक्षी (गुह्यका देवी) के प्रमाणिक मंत्र: कुब्जिकातन्त्र के महा-आवाहन, रक्षा-अमृत मंत्र और नाम-जप विधि

चण्डाक्षी श्रेणी के लेख आम तौर पर महत्व, विधि, समय, शास्त्रीय आधार और सावधानियों को अलग-अलग हिस्सों में खोलते हैं. Tantra संग्रह के दूसरे लेख यही पृष्ठभूमि और गहरी करते हैं।

चण्डाक्षी देवी मंत्र, गुह्यका देवी उपासना, चण्डाक्षी महा आवाहन मंत्र जैसे जुड़े विषय आगे पढ़ने से यह समझ आता है कि विषय का व्यवहारिक उपयोग क्या है, किन परिस्थितियों में नियम बदलते हैं और किस जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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इसी विषय के 5 प्रश्न आपके व्यावहारिक संदेह साफ कर सकते हैं।

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❓ इस विषय के 5 प्रश्न

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नील सरस्वती स्तोत्र का क्या महत्व है?

नील सरस्वती स्तोत्र: 22 मंत्रों का स्तुति ग्रंथ। 11 या 21 बार नियमित पाठ = विद्या, वाणी और वाक् सिद्धि का वरदान। मूल स्रोत = 'प्रच्छण्ड चण्डिकास्तोत्र' (मूलतः देवी चण्डिका के लिए)।

शब्द ब्रह्म और मंत्र शक्ति

देवी मंत्र क्या होते हैं?

देवी मंत्र साधारण शब्द नहीं बल्कि देवी का ध्वनि-स्वरूप है — जपने पर उनकी चेतना की आवृत्ति का आवाहन होता है और यह जड़ पदार्थ में चेतना संचार करने में सक्षम देवी की साक्षात् शक्ति है।

पूजा विधि

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