विस्तृत उत्तर
नील सरस्वती देवी की पूजा में सबसे पहले 'नील सरस्वती स्तोत्र' का पाठ किया जाता है। यह स्तोत्र 22 मंत्रों का होता है जिसमें देवी की स्तुति और उनसे इच्छित वरदान माँगा जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि जो विद्यार्थी या साधक नियमित रूप से 11 या 21 बार नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन्हें विद्या, वाणी और वाक्सिद्धि का विशेष वरदान मिलता है।
प्रसिद्ध नील सरस्वती स्तोत्र का मूल स्रोत एक तांत्रिक ग्रंथ 'प्रच्छण्ड चण्डिकास्तोत्र' माना जाता है, जो पहले देवी चण्डिका (काली) के लिए था, लेकिन बाद में इसे नील सरस्वती पर भी लागू किया गया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





