विस्तृत उत्तर
हाँ, कृष्ण पूजा में तुलसी को अनिवार्य माना गया है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार तुलसी के बिना श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा अधूरी होती है।
पद्म पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि जिस प्रसाद में तुलसी नहीं होती, उसे भगवान स्वीकार नहीं करते। भगवान विष्णु, योगेश्वर कृष्ण और पांडुरंग के पूजन में तुलसी पत्रों का हार अर्पण करना अनिवार्य माना गया है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि श्रीकृष्ण और विष्णु तुलसी पत्र से प्रोक्षण किए बिना नैवेद्य (भोग) स्वीकार नहीं करते। यहाँ तक कि स्वर्ण, रत्न और मोती से बने पुष्प भी तुलसी के बिना अधूरे माने जाते हैं।
तुलसी को श्रीकृष्ण की प्रिया और भगवान विष्णु की पत्नी माना गया है। उनका एक नाम 'वृंदा' है जिससे वृंदावन का नाम पड़ा। वायु पुराण में यह नियम भी बताया गया है कि बिना स्नान किए तुलसी तोड़कर पूजा करना अपराध है और उसकी पूजा निष्फल हो जाती है। रविवार और एकादशी तिथि को तुलसी पत्र नहीं तोड़ने का विधान है।
इस प्रकार तुलसी का भोग, पूजा और प्रसाद — तीनों में विशेष स्थान है। जन्माष्टमी हो या नित्य पूजा, तुलसी दल के बिना भोग अर्पण अपूर्ण माना जाता है।





