विस्तृत उत्तर
संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को रखा जाता है — यह सबसे सरल और प्रचलित व्रतों में से एक है।
विधि
- 116 शुक्रवार लगातार व्रत रखें (कम से कम, अधिक भी रख सकते हैं)।
- 2प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- 3संतोषी माता की तस्वीर/मूर्ति के सामने गुड़-चने का प्रसाद रखें (गुड़ + भुने चने = मुख्य प्रसाद)।
- 4दीपक (घी/तेल) और अगरबत्ती जलाएँ।
- 5संतोषी माता व्रत कथा पढ़ें/सुनें।
- 6*'जय संतोषी माता'* आरती करें।
- 7एक समय भोजन — बिना खट्टी चीज। खट्टा वर्जित (नींबू, इमली, दही, अचार, आँवला, अमचूर — सब वर्जित)।
- 816वें शुक्रवार उद्यापन करें — 8 लड़कों को भोजन कराएँ।
नियम
- ▸व्रत के दिन खट्टा बिल्कुल न खाएँ, न खिलाएँ — यह सबसे महत्वपूर्ण नियम।
- ▸सात्विक भोजन — मांसाहार, प्याज-लहसुन वर्जित।
- ▸व्रत सच्ची श्रद्धा से रखें।
लाभ: मनोकामना पूर्ति, पारिवारिक सुख, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि।





