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पूजा विधि📜 संतोषी माता व्रत कथा, धर्मशास्त्र1 मिनट पठन

शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत कैसे रखें?

संक्षिप्त उत्तर

16 शुक्रवार लगातार। गुड़-चने प्रसाद, व्रत कथा, आरती। सबसे बड़ा नियम: खट्टा पूर्णतः वर्जित (दही/नींबू/इमली/अचार)। एक समय सात्विक भोजन। 16वें शुक्रवार उद्यापन — 8 बालकों को भोजन।

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विस्तृत उत्तर

संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को रखा जाता है — यह सबसे सरल और प्रचलित व्रतों में से एक है।

विधि

  1. 116 शुक्रवार लगातार व्रत रखें (कम से कम, अधिक भी रख सकते हैं)।
  2. 2प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  3. 3संतोषी माता की तस्वीर/मूर्ति के सामने गुड़-चने का प्रसाद रखें (गुड़ + भुने चने = मुख्य प्रसाद)।
  4. 4दीपक (घी/तेल) और अगरबत्ती जलाएँ।
  5. 5संतोषी माता व्रत कथा पढ़ें/सुनें।
  6. 6*'जय संतोषी माता'* आरती करें।
  7. 7एक समय भोजन — बिना खट्टी चीज। खट्टा वर्जित (नींबू, इमली, दही, अचार, आँवला, अमचूर — सब वर्जित)।
  8. 816वें शुक्रवार उद्यापन करें — 8 लड़कों को भोजन कराएँ।

नियम

  • व्रत के दिन खट्टा बिल्कुल न खाएँ, न खिलाएँ — यह सबसे महत्वपूर्ण नियम।
  • सात्विक भोजन — मांसाहार, प्याज-लहसुन वर्जित।
  • व्रत सच्ची श्रद्धा से रखें।

लाभ: मनोकामना पूर्ति, पारिवारिक सुख, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि।

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शास्त्रीय स्रोत
संतोषी माता व्रत कथा, धर्मशास्त्र
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