विस्तृत उत्तर
हनुमान जी को तेल और सिंदूर चढ़ाना एक प्राचीन परंपरा है जिसकी पौराणिक कथा रामायण से जुड़ी है।
पौराणिक कथा (verified)
माता सीता मांग में सिंदूर लगाती थीं। हनुमान जी ने पूछा — 'माता, यह क्यों लगाती हैं?' सीता ने कहा — 'प्रभु श्रीराम की लंबी आयु के लिए।' हनुमान जी ने सोचा — यदि थोड़ा सिंदूर इतना लाभकारी है तो पूरे शरीर पर लगाने से प्रभु की आयु और बढ़ेगी। उन्होंने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तभी से हनुमान जी को नारंगी सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है।
विधि (TV9, Katha Sangrah verified)
- 1मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर जाएँ।
- 2नारंगी सिंदूर (लाल नहीं) + चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी को अर्पित करें।
- 3हनुमान जी के दाहिने कंधे का सिंदूर तिलक लगाएँ (अत्यंत लाभकारी)।
- 4हनुमान चालीसा/बजरंग बाण पाठ करें।
- 5गुड़-चने का भोग लगाएँ।
लाभ
- ▸शनि दोष निवारण (हनुमान जी शनि को वश में रखते हैं)।
- ▸भय, रोग, शत्रु से रक्षा।
- ▸संकट मोचन — सभी बाधाएँ दूर।
शनिवार विशेष: शनिवार को हनुमान पूजा इसलिए क्योंकि हनुमान जी ने शनिदेव को लंका में बंधन से मुक्त किया था और शनि ने वचन दिया कि हनुमान भक्तों को मैं कष्ट नहीं दूँगा।





