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हनुमान जी का गुप्त शाबर मंत्र: 3 दिन में शत्रु और रोग का नाश!
हनुमान

हनुमान जी का गुप्त शाबर मंत्र: 3 दिन में शत्रु और रोग

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 26 मई 2025
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शिव पुराण और स्कन्द पुराण से प्रमाणित यह हनुमान मंत्र, हवन सामग्री और 21 दिवसीय साधना विधि के साथ देता है अद्भुत परिणाम

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श्री हनुमान के रुद्रावतार स्वरूप के मंत्र

श्री हनुमान के रुद्रावतार स्वरूप के मंत्र

भगवान हनुमान को भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्र अवतार माना जाता है। उनका यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और शीघ्र फल प्रदान करने वाला माना गया है। इस रुद्रावतार स्वरूप की उपासना के लिए विशिष्ट मंत्र और साधना विधियां शास्त्रों में वर्णित हैं, जो प्रायः अल्पज्ञात हैं परन्तु अत्यंत प्रभावी हैं।

"ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारिणे सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा"

पौराणिक स्रोत

यह मंत्र स्कन्द पुराण और शिव पुराण जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक ग्रंथों में पाया जाता है। इन पुराणों में इस मंत्र की महिमा और प्रयोग विधि का उल्लेख मिलता है। यह मंत्र हनुमान जी के रुद्र (शिव) अवतार स्वरूप को स्पष्ट रूप से इंगित करता है, जो उन्हें संहारक और शक्तिशाली शक्तियों से जोड़ता है। "सर्वशत्रुसंहारिणे" और "सर्वरोगहराय" जैसे वाक्यांश इसी रुद्र स्वरूप की क्षमताओं को दर्शाते हैं।

विशिष्ट साधना विधि

हवन सामग्री: इस मंत्र की साधना में विशिष्ट हवन सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जिसमें काले तिल, जौ (यव) और गुग्गुल प्रमुख हैं।

प्रक्रिया: इन सामग्रियों को गाय के घी में मिलाकर, कंडे या अग्नि प्रज्वलित कर, इस मंत्र का उच्चारण करते हुए 11 या 21 बार आहुति देने का विधान है।

अवधि: इस साधना को 21 दिनों तक निरंतर करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है, ऐसा माना जाता है।

प्रभाव एवं लाभ

यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इसके जप तथा अनुष्ठान से साधक को विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। प्रमुख लाभों में शत्रु नाश, सभी प्रकार के रोगों का हरण, सर्व वशीकरण (सभी को अपने अनुकूल बनाना), कार्यों में सफलता और कीर्ति प्राप्ति सम्मिलित हैं। यह मंत्र विशेष रूप से कष्टमय जीवन, असाध्य बीमारियों और प्रबल शत्रुओं से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है।

अल्पज्ञातता एवं विशिष्टता

यह मंत्र स्पष्ट रूप से हनुमान जी को 'रुद्रावतार' के रूप में संबोधित करता है, जिससे साधक उनकी शिव-अंश से प्राप्त प्रचंड शक्ति का आह्वान करता है। यह विशेष रूप से शत्रु दमन और कठिन बाधाओं के निवारण के लिए उपयुक्त है। काले तिल, जौ और गुग्गुल जैसी विशेष हवन सामग्रियों का प्रयोग तांत्रिक और शुद्धिकरण प्रक्रियाओं की ओर संकेत करता है, जो इस मंत्र की शक्ति को और भी बढ़ाते हैं। यद्यपि हनुमान जी के कई मंत्र प्रचलित हैं, यह विशिष्ट मंत्र अपनी पूर्ण साधना विधि (विशेष हवन सामग्री सहित) और इसके स्पष्ट पौराणिक स्रोतों (स्कन्द पुराण, शिव पुराण) के साथ आम जनता में अपेक्षाकृत कम ज्ञात हो सकता है, जो इसे अल्पज्ञात और शक्तिशाली मंत्रों की श्रेणी में रखता है।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

साधना विधि

हनुमान साधना कैसे करें?

मंगलवार को ब्रह्ममुहूर्त में लाल आसन पर बैठकर, चमेली का दीप जलाएं, सिंदूर चढ़ाएं, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप करें। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ सर्वोत्तम साधना है। 21 मंगलवार की साधना से विशेष फल मिलता है।

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा रोज पढ़ने से क्या होता है?

हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी है।

मंत्र सिद्धि

हनुमान मंत्र सिद्धि कैसे करें?

मुख्य मंत्र: 'ॐ हं हनुमते नमः' (5 अक्षर = 5 लाख पुरश्चरण)। मंगलवार-शनिवार, हनुमान जयंती। 41 दिन का अनुष्ठान प्रचलित। केसरिया वस्त्र, मूंगा/रुद्राक्ष माला। भोग: सिन्दूर, लड्डू। हनुमान चालीसा 108 बार = मंत्र-जप तुल्य। कलियुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता।

भक्ति उपाय

हनुमान जी को प्रसन्न कैसे करें?

हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय: हनुमान चालीसा पाठ, राम नाम जप, सिंदूर अर्पण, चमेली के तेल का दीप, गुड़-चना का भोग और मंगलवार-शनिवार को सुंदरकांड पाठ करें। ब्रह्मचर्य, सत्य और सेवा भाव से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

हनुमान

हनुमान चालीसा का पाठ रात में करना चाहिए या नहीं?

हां — कभी भी। प्रातः सर्वोत्तम, रात मान्य (भय/संकट विशेष)। 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै' — रात = रक्षा। कोई वर्जित नहीं। हनुमान = सदा जागृत, सबसे सुलभ।

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