विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, संध्या वंदन या शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले दीप प्रज्वलित करने की परंपरा है, क्योंकि दीपक को ज्ञान, प्रकाश और परब्रह्म का स्वरूप माना जाता है। दीपक जलाते समय सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक मंत्र यह पढ़ा जाता है— 'शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥' इसका अर्थ है कि— जो शुभ करता है, कल्याण करता है, रोगों का नाश कर आरोग्य और धन-संपत्ति प्रदान करता है तथा मेरे शत्रुओं की (बुरी) बुद्धि का विनाश करता है, ऐसे दीप की ज्योति को मैं नमस्कार करता हूँ। यह दीप ज्योति साक्षात परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है, यह मेरे पापों को हरे।





