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विस्तृत उत्तर
ध्यान करते समय साधक उन्हें कमल पर विराजमान, चार भुजाओं वाली देवी के रूप में कल्पना करता है — जिनके हाथों में क्रमशः:
— खड्ग (तलवार)
— खप्पर (कपाल)
— पुस्तक
— वीणा
यह उनके त्रिगुणात्मक स्वरूप को दर्शाता है:
— ज्ञान (पुस्तक)
— कला (वीणा)
— संहार शक्ति (खड्ग और खप्पर)
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