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विस्तृत उत्तर
ग्रहण आदि कालों में लिङ्ग के अभिषेक का विधान बताया गया है। उसी के साथ अभिषेक का फल भी वर्णित कहा गया है। अनुक्रमणिका केवल इतना बताती है कि ग्रहण आदि विशेष कालों में लिङ्गाभिषेक की विधि और फल का विषय आता है; यहाँ पूरी पूजा-विधि या फल का विस्तार नहीं दिया गया।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 17, श्लोक 24
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