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ग्रहण से जुड़े सभी प्रश्न(16)

ग्रहण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 16 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव पूजा नियम

शिव की पूजा में ग्रहण काल विशेष रूप से शुभ क्यों माना जाता है?

ग्रहण = ब्रह्मांडीय ऊर्जा संकेंद्रण — जप 100-1000 गुना फल। शिव = राहु-केतु नियंत्रक। महामृत्युंजय जप सर्वोत्तम। ग्रहण स्पर्श→मोक्ष तक जप। ग्रहण बाद स्नान + दान।

#ग्रहण#सूर्य ग्रहण#चंद्र ग्रहण
तंत्र शास्त्र

तंत्र साधना में ग्रहण काल का क्या महत्व है?

अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' ग्रहण = लाख गुना फल। ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन, सूक्ष्म द्वार खुले। स्पर्श→मोक्ष निरंतर। स्नान+जल में। विस्तृत: Q515 देखें।

#ग्रहण#तंत्र#मंत्र सिद्धि
मंत्र विधि

मंत्र जप में ग्रहण काल का क्या विशेष महत्व है?

ग्रहण जप = लाख गुना फल। अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' विधि: स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप, स्नान, जल में खड़े। भोजन/शयन वर्जित। सूर्य ग्रहण: गायत्री/आदित्य। चंद्र: शिव मंत्र। गर्भवती: सावधानी। मंत्र सिद्धि का सर्वोत्तम अवसर।

#ग्रहण#सूर्य ग्रहण#चंद्र ग्रहण
पूजा विधि

लिंग अभिषेक कब करने का विधान बताया गया है?

ग्रहण आदि कालों में लिङ्ग के अभिषेक का विधान और उसका फल बताया गया है।

#लिंग अभिषेक#ग्रहण#अभिषेक फल
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण पर तर्पण करना चाहिए क्या

हाँ — ग्रहण काल में तर्पण/दान = अनेक गुना पुण्य। ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) पर स्नान + तिल-जल तर्पण + दान = सर्वोत्तम। भोजन वर्जित, पर जप/तर्पण/दान = अत्यंत शुभ।

#ग्रहण#तर्पण#सूर्य
दैनिक आचार

ग्रहण काल में गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए

लोक मान्यता: ग्रहण न देखें, चाकू/कैंची न उठाएं, मंत्र जप करें, दूर्वा रखें। चिकित्सा विज्ञान: कोई प्रमाणित हानि नहीं। संतुलन: आस्था अनुसार सावधानी + दवाई/भोजन समय पर + तनाव न लें। डॉक्टर > लोक मान्यता।

#ग्रहण#गर्भवती#सावधानी
दैनिक आचार

ग्रहण काल में खाना पीना बंद करना जरूरी है क्या

परंपरा: ग्रहण काल में भोजन/जल वर्जित (धर्मसिंधु)। सूतक 12 घंटे पहले (सूर्य)/9 घंटे (चंद्र)। बाद: स्नान, दान, पुराना भोजन त्यागें। वैज्ञानिक प्रमाण अभाव। बीमार/बच्चे/गर्भवती: स्वास्थ्य > परंपरा।

#ग्रहण#सूतक#भोजन
ग्रहण

ग्रहण के समय मंत्र का प्रभाव सामान्य समय से कितना गुना बढ़ता है

ग्रहण जप = लाख गुना (1,00,000×) फल — 'लक्षगुणमवाप्नोति' (शास्त्र)। सूर्य/चन्द्र ग्रहण दोनों। खग्रास > खण्डग्रास। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा विशेष। गायत्री/महामृत्युंजय। 'लाख गुना'=प्रतीकात्मक — 'अत्यन्त अधिक'। ग्रहण = सर्वोत्तम साधना अवसर।

#ग्रहण#मंत्र जप#लाख गुना
ग्रहण विधि

ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर देते हैं?

कपाट बंद: सूतक (गर्भगृह सुरक्षा), राहु-केतु कवच, दर्शन वर्जित, पुनः शुद्धि बाद खुलें। भक्त=बाहर जप (करोड़गुना)। कुछ दक्षिण मंदिर=अपवाद।

#ग्रहण#मंदिर कपाट#बंद
ग्रहण विधि

ग्रहण के बाद भगवान की मूर्ति को स्नान कराना क्यों जरूरी है?

मूर्ति स्नान: सूतक शुद्धि, पुनः प्रतिष्ठा, आगम विधान (पंचामृत+गंगाजल), नवीन पूजा। स्वयं स्नान→मूर्ति अभिषेक→नवीन वस्त्र→आरती→कपाट खुलें।

#ग्रहण#मूर्ति स्नान#शुद्धि
ग्रहण विधि

सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिला को लोहे की चीज क्यों रखनी चाहिए?

लोहा: लोक मान्यता — राहु निवारक, गर्भ कवच। आयुर्वेद: iron प्रतीक। वैज्ञानिक: सिद्ध नहीं। भावना सम्मान — हानि नहीं। सूर्य ग्रहण न देखें। मंत्र जप सर्वोत्तम।

#गर्भवती#लोहा#ग्रहण
ग्रहण विधि

ग्रहण काल में तुलसी का पत्ता भोजन में क्यों रखते हैं?

तुलसी ग्रहण: पवित्रतम, राहु निष्क्रिय। वैज्ञानिक: एंटीबैक्टीरियल (यूजेनॉल), प्राकृतिक preservative। दूध-दही-पानी सबमें। सूतक से पहले डालें, ग्रहण में न तोड़ें।

#तुलसी#ग्रहण#भोजन शुद्धि
ग्रहण

ग्रहण के समय मंत्र जप का क्या विशेष प्रभाव होता है

ग्रहण जप = लाख गुना फल (शास्त्रीय मान्यता)। गायत्री, महामृत्युंजय, इष्ट मंत्र। सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'। चन्द्र: 'ॐ सोमाय नमः'। स्पर्श से मोक्ष तक निरन्तर। कुश आसन + पवित्री। मोक्ष बाद स्नान + दान।

#ग्रहण#मंत्र जप#सूर्य ग्रहण
ग्रहण

ग्रहण काल में कुश का प्रयोग क्यों करते हैं

ग्रहण में कुश: कुश = सर्वाधिक पवित्र तृण, सात्विक ऊर्जा। भोजन/जल पर रखने से ग्रहण का दूषित प्रभाव निष्प्रभ। तुलसी पत्र भी साथ। कुश पवित्री पहनकर जप। मान्यता: कुश नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करता है। बिना कुश का भोजन ग्रहण बाद त्याज्य (कुछ परम्पराओं में)।

#ग्रहण#कुश#दर्भ
ग्रहण विधि

ग्रहण काल में पूजा और जप कैसे करें?

ग्रहण काल: स्नान → जप (सर्वोत्तम कर्म, करोड़गुना फल)। सूर्य ग्रहण: सूर्य मंत्र/गायत्री। चन्द्र ग्रहण: चन्द्र मंत्र/महामृत्युंजय। इष्ट मंत्र जप। मोक्ष पर: पुनः स्नान → दान → पूजा। भोजन में तुलसी डालें। सोना वर्जित।

#ग्रहण#सूर्य ग्रहण#चन्द्र ग्रहण
मंदिर ज्ञान

मंदिर में प्रसाद कैसे ग्रहण करें — दाएं हाथ से या दोनों से?

दोनों हाथ (अंजलि — दाहिना ऊपर, बायां नीचे)। शिर झुकाकर। भूमि पर नहीं। पूर्ण खाएं (जूठा नहीं)। बांटें। केवल बायां = वर्जित।

#प्रसाद#ग्रहण#दाएं
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