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ग्रहण📜 धर्मसिन्धु, स्मृति ग्रंथ, ज्योतिष शास्त्र2 मिनट पठन

ग्रहण के समय मंत्र जप का क्या विशेष प्रभाव होता है

संक्षिप्त उत्तर

ग्रहण जप = लाख गुना फल (शास्त्रीय मान्यता)। गायत्री, महामृत्युंजय, इष्ट मंत्र। सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'। चन्द्र: 'ॐ सोमाय नमः'। स्पर्श से मोक्ष तक निरन्तर। कुश आसन + पवित्री। मोक्ष बाद स्नान + दान।

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विस्तृत उत्तर

ग्रहण (सूर्य/चन्द्र) काल में मंत्र जप का प्रभाव सामान्य समय से लाखों गुना अधिक माना गया है।

शास्त्रीय मान्यता

  • ग्रहण काल में ब्रह्माण्डीय ऊर्जा का विशेष प्रवाह होता है।
  • इस समय किया गया जप, तप, ध्यान = लाखों गुना फल।
  • 'ग्रहणे यत्कृतं दानं जपहोमार्चनादिकम्। लक्षगुणमवाप्नोति' — ग्रहण में दान-जप-होम = लाख गुना फल।

कौन से मंत्र

  1. 1गायत्री मंत्र — सर्वश्रेष्ठ (सूर्य + चन्द्र दोनों ग्रहण में)।
  2. 2महामृत्युंजय मंत्र — रक्षा और आरोग्य।
  3. 3इष्टदेवता मंत्र — अपने इष्ट का बीज मंत्र।
  4. 4सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'।
  5. 5चन्द्र ग्रहण: 'ॐ सोमाय नमः' या 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः'।
  6. 6राहु/केतु मंत्र — ग्रहण राहु-केतु से होता है, अतः इनके मंत्र भी प्रभावी।

जप विधि

  • ग्रहण स्पर्श (आरम्भ) से मोक्ष (समाप्ति) तक निरन्तर जप।
  • कुश आसन पर बैठें, कुश पवित्री पहनें।
  • स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र में।
  • मौन रहें, केवल मंत्र जप।
  • ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान → दान।

ध्यान दें: ग्रहण सम्बन्धी मान्यताएँ परम्परागत हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है। सूर्य ग्रहण में नग्न नेत्रों से सूर्य न देखें।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिन्धु, स्मृति ग्रंथ, ज्योतिष शास्त्र
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