विस्तृत उत्तर
ग्रहण (सूर्य/चन्द्र) काल में मंत्र जप का प्रभाव सामान्य समय से लाखों गुना अधिक माना गया है।
शास्त्रीय मान्यता
- ▸ग्रहण काल में ब्रह्माण्डीय ऊर्जा का विशेष प्रवाह होता है।
- ▸इस समय किया गया जप, तप, ध्यान = लाखों गुना फल।
- ▸'ग्रहणे यत्कृतं दानं जपहोमार्चनादिकम्। लक्षगुणमवाप्नोति' — ग्रहण में दान-जप-होम = लाख गुना फल।
कौन से मंत्र
- 1गायत्री मंत्र — सर्वश्रेष्ठ (सूर्य + चन्द्र दोनों ग्रहण में)।
- 2महामृत्युंजय मंत्र — रक्षा और आरोग्य।
- 3इष्टदेवता मंत्र — अपने इष्ट का बीज मंत्र।
- 4सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'।
- 5चन्द्र ग्रहण: 'ॐ सोमाय नमः' या 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः'।
- 6राहु/केतु मंत्र — ग्रहण राहु-केतु से होता है, अतः इनके मंत्र भी प्रभावी।
जप विधि
- ▸ग्रहण स्पर्श (आरम्भ) से मोक्ष (समाप्ति) तक निरन्तर जप।
- ▸कुश आसन पर बैठें, कुश पवित्री पहनें।
- ▸स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र में।
- ▸मौन रहें, केवल मंत्र जप।
- ▸ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान → दान।
ध्यान दें: ग्रहण सम्बन्धी मान्यताएँ परम्परागत हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है। सूर्य ग्रहण में नग्न नेत्रों से सूर्य न देखें।





