विस्तृत उत्तर
मंदिर कपाट बंद:
- 1सूतक: अशुद्ध वातावरण में गर्भगृह = मूर्ति सुरक्षित रखना।
- 2राहु-केतु: नकारात्मक ऊर्जा = मूर्ति कवच।
- 3पूजा/दर्शन वर्जित: सूतक में मूर्ति दर्शन (कुछ परम्पराओं में) वर्जित।
- 4पुनः शुद्धि: ग्रहण बाद मूर्ति स्नान + नवीन भोग → तब कपाट।
- 5जप काल: भक्त बाहर जप करें = करोड़गुना फल। ग्रहण = साधना हेतु सर्वोत्तम।
अपवाद: कुछ दक्षिण भारत मंदिरों में ग्रहण काल में विशेष अभिषेक — कपाट खुले। परम्परा भिन्न।





