विस्तृत उत्तर
सूतक (वेध) ग्रहण से पूर्व का अशुद्धि काल है जिसमें भोजन, पूजा (कुछ परम्पराओं में), और शुभ कार्य वर्जित हैं।
सूर्य ग्रहण में सूतक नियम
- 1सूतक अवधि: सूर्य ग्रहण में सूतक ग्रहण से 12 घण्टे पूर्व लगता है। चन्द्र ग्रहण में 9 घण्टे पूर्व।
- 1सूतक में क्या वर्जित:
- ▸भोजन पकाना और खाना।
- ▸नया भोजन बनाना (पहले से बना भोजन में तुलसी पत्र डालकर रखें)।
- ▸शुभ कार्य (पूजा-पाठ कुछ परम्पराओं में, विवाह, गृह प्रवेश आदि)।
- ▸सोना।
- ▸मैथुन।
- 1सूतक में क्या करें:
- ▸मंत्र जप (यह सूतक काल में भी शुभ है)।
- ▸ध्यान, चिंतन।
- ▸ग्रहण स्पर्श (आरम्भ) होने पर स्नान।
- 1सूतक कब नहीं लगता:
- ▸यदि ग्रहण आपके क्षेत्र में दिखाई न दे तो सूतक लागू नहीं होता।
- ▸रोगी, वृद्ध, गर्भवती और बच्चों को सूतक में भोजन की छूट है (स्वास्थ्य से समझौता न करें)।
- ▸खण्डग्रास ग्रहण में सूतक अवधि कम होती है।
- 1सूतक समाप्ति: ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) के बाद स्नान करने से सूतक समाप्त होता है।
ध्यान दें: सूतक के नियम क्षेत्र और परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। दक्षिण भारत और उत्तर भारत में कुछ नियमों में अंतर है।





