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ग्रहण विधि📜 धर्मसिंधु, स्मृतिग्रंथ1 मिनट पठन

ग्रहण काल में दान करने से पुण्य कई गुना क्यों बढ़ता है?

संक्षिप्त उत्तर

ग्रहण दान: पुण्यकाल (करोड़गुना — स्मृति), सन्धि काल=कर्मफल तीव्र, अशुद्धि में त्याग=अधिक पुण्य। तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा/चाँदी। ग्रहण मोक्ष समय सर्वोत्तम।

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विस्तृत उत्तर

ग्रहण दान = अनेकगुना पुण्य:

  1. 1पुण्यकाल: ग्रहण = ब्रह्माण्डीय ऊर्जा असामान्य। शुभ कर्म = करोड़गुना।
  2. 2स्मृति: 'ग्रहणे दत्तं दानं कोटिगुणं भवेत्।'
  3. 3सन्धि काल: सूर्य/चन्द्र पर संक्रमण = ऊर्जा तीव्र = कर्मफल तीव्र।
  4. 4अशुद्धि में शुद्धि: दान (त्याग) = अशुद्धि काल में शुद्धि = अत्यधिक पुण्य।
  5. 5दान सामग्री: काले तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा (सूर्य)/चाँदी (चन्द्र), फल, दक्षिणा।

ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) समय दान = सर्वोत्तम।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, स्मृतिग्रंथ
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