विस्तृत उत्तर
ग्रहण दान = अनेकगुना पुण्य:
- 1पुण्यकाल: ग्रहण = ब्रह्माण्डीय ऊर्जा असामान्य। शुभ कर्म = करोड़गुना।
- 2स्मृति: 'ग्रहणे दत्तं दानं कोटिगुणं भवेत्।'
- 3सन्धि काल: सूर्य/चन्द्र पर संक्रमण = ऊर्जा तीव्र = कर्मफल तीव्र।
- 4अशुद्धि में शुद्धि: दान (त्याग) = अशुद्धि काल में शुद्धि = अत्यधिक पुण्य।
- 5दान सामग्री: काले तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा (सूर्य)/चाँदी (चन्द्र), फल, दक्षिणा।
ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) समय दान = सर्वोत्तम।





