विस्तृत उत्तर
महातल लोक में जन्म पुण्य और तमोगुण के मिश्रित परिणाम से जुड़ा है। जिन जीवों ने तपस्या, दान, यज्ञ और भौतिक उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, उनके पास सकाम पुण्य होते हैं। लेकिन यदि उनके भीतर आध्यात्मिक चेतना, वैराग्य और ईश्वर भक्ति का अभाव है, और उनका स्वभाव क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार, धन-सत्ता की लालसा और आक्रामकता से भरा है, तो यह तमोगुणी अवस्था उन्हें अधोलोकों की ओर ले जाती है। ऐसे जीव महातल में शक्तिशाली नागों या दैत्यों के रूप में जन्म पाते हैं और स्वर्ग से भी श्रेष्ठ भौतिक सुख भोगते हैं, लेकिन ईश्वर-विमुखता के कारण भय से मुक्त नहीं होते।
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