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श्री गंगा स्तोत्रम्: शंकराचार्य कृत, पाप नाश और मोक्ष का रहस्य
गंगा

श्री गंगा स्तोत्रम्: शंकराचार्य कृत

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अंतिम अपडेट: 7 जनवरी 2026
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श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित पावन स्तुति | सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं गंगा महिमा श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित - सम्पूर्ण पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Stotram श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित भाग 1: श्री गंगा स्तोत्रम् (मूल संस्कृत पाठ) ।। अथ श्री गंगा स्तोत्रम् ।। देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे...

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श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित - सम्पूर्ण पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Stotram

श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित

भाग 1: श्री गंगा स्तोत्रम् (मूल संस्कृत पाठ)

।। अथ श्री गंगा स्तोत्रम् ।।
देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे । शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।
भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः । नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ।।
हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे । दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम् ।।
तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम् । मातर्गंगे त्वयि यो भक्तः किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ।।
पतितोद्धारिणि जाह्नवि गंगे खण्डितगिरिवरमण्डितभंगे । भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये ।।
कल्पलतामिव फलदां लोके प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके । पारावारविहारिणि गंगे विमुखयुवतिकृततरलापांगे ।। ६ ।।
तव चेन्मातः स्रोतःस्नातः पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः । नरकनिवारिणि जाह्नवि गंगे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे ।।
पुनरसदंगे पुण्यतरंगे जय जय जाह्नवि करुणापांगे । इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ।।
रोगं शोकं तापं पापं हर मे भगवति कुमतिकलापम् । त्रिभुवनसारे वसुधाहारे त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ।।
अलकानन्दे परमानन्दे कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये । तव तटनिकटे यस्य निवासः खलु वैकुण्ठे तस्य निवासः ।।
वरमिह नीरे कमठो मीनः किं वा तीरे शरटः क्षीणः । अथवा श्वपचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः ।।
भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये । गंगास्तवमिमममलं नित्यं पठति नरो यः स जयति सत्यम् ।।
येषां हृदये गंगा भक्तिस्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः । मधुराकान्तापज्झटिकाभिः परमानन्दकलितललिताभिः ।।
गंगास्तोत्रमिदं भवसारं वाञ्छितफलदं विमलं सारम् । शंकरसेवकशंकररचितं पठति सुखी स्तव इति च समाप्तः ।।
।। इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीगंगास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
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❓ इस विषय के 5 प्रश्न

लक्ष्मी पूजा सामग्री

लक्ष्मी पूजा में गोमती चक्र रखने का क्या लाभ है?

गोमती नदी का प्राकृतिक चक्र = लक्ष्मी प्रतीक। तिजोरी में 11 (लाल कपड़ा) = धन वृद्धि। बुरी नजर निवारण। व्यापार वृद्धि। दीपावली: श्रीयंत्र+गोमती चक्र+कौड़ी। गंगाजल शुद्धि।

तीर्थ एवं मोक्ष

गंगातट पर मृत्यु से मोक्ष का विधान क्या है?

गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।

संत और भक्त

शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत कैसे स्थापित किया

शंकराचार्य (788-820 ई.) ने 32 वर्ष में: अद्वैत — 'ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या, जीव = ब्रह्म'। प्रस्थानत्रयी पर भाष्य, भारतभर शास्त्रार्थ, 4 मठ (श्रृंगेरी, द्वारका, ज्योतिर्मठ, गोवर्धन), दर्जनों ग्रंथ। बौद्ध प्रभाव से वैदिक धर्म को पुनर्स्थापित किया।

ज्ञान एवं दर्शन

पाँच मठ और शंकराचार्य परंपरा

आदि शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए — दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन (पुरी), पश्चिम में द्वारका और उत्तर में ज्योतिर्मठ। इन चार पीठों के प्रमुख को जगद्गुरु शंकराचार्य कहते हैं।

भक्ति एवं आध्यात्म

माया क्या है शंकराचार्य के अनुसार?

शंकराचार्य के अनुसार माया वह अनिर्वचनीय शक्ति है जो ब्रह्म के एकमात्र सत्य को आच्छादित करके जगत की मिथ्या प्रतीति कराती है। ज्ञान से ही माया का पर्दा हटता है।

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