
श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित पावन स्तुति | सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं गंगा महिमा श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित - सम्पूर्ण पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Stotram श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित भाग 1: श्री गंगा स्तोत्रम् (मूल संस्कृत पाठ) ।। अथ श्री गंगा स्तोत्रम् ।। देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे...
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पंडित अरुण पाठक एवं आचार्य शशि शेखर पाठक. "श्री गंगा स्तोत्रम्: शंकराचार्य कृत, पाप नाश और मोक्ष का रहस्य." पौराणिक, 2026. https://pauranik.org/post/shri-ganga-stotram-adi-shankaracharya-sanskrit-path-maa-ganga-mahima
चन्द्रशेखराष्टकम् भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप को समर्पित एक शास्त्राधारित स्तोत्र है जो चन्द्रदोष से उत्पन्न मानसिक अशांति, भय और भावनात्मक अस्थिरता दूर करने का अचूक उपाय है।
1. दुर्गा सप्तशती (सर्वशक्तिमान)। 2. सिद्ध कुंजिका (सरलतम = सप्तशती फल)। 3. महिषासुर मर्दिनी (लोकप्रिय)। 4. 'या देवी सर्वभूतेषु...'। 5. अपराधक्षमापन। 6. चालीसा (दैनिक)।
दुर्गा सप्तशती प्रथम चरित्र = सर्वश्रेष्ठ। 'ॐ जयन्ती मंगला काली...' (कालिका पुराण)। काली कवच, अष्टकम्। सरल: 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' 108 बार।
अष्टकम् का अर्थ है आठ श्लोकों वाला स्तोत्र — चन्द्रशेखराष्टकम् में शिव के आठ विशिष्ट गुणों और लीलाओं का वर्णन है।
वाक् सूक्त = ऋग्वेद के 10वें मंडल का 125वाँ सूक्त। मन्त्र द्रष्टा = महर्षि अम्भृण की पुत्री 'वाक्'। यह परब्रह्म के साथ एकाकार अवस्था में उनकी 'आत्म-स्तुति' है और दुर्गा सप्तशती का प्रवेश द्वार भी माना जाता है।