
श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित पावन स्तुति | सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं गंगा महिमा श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित - सम्पूर्ण पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Stotram श्री गंगा स्तोत्रम्: आदि शंकराचार्य विरचित भाग 1: श्री गंगा स्तोत्रम् (मूल संस्कृत पाठ) ।। अथ श्री गंगा स्तोत्रम् ।। देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे...
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पंडित अरुण पाठक एवं आचार्य शशि शेखर पाठक. "श्री गंगा स्तोत्रम्: शंकराचार्य कृत, पाप नाश और मोक्ष का रहस्य." पौराणिक, 2026. https://pauranik.org/post/shri-ganga-stotram-adi-shankaracharya-sanskrit-path-maa-ganga-mahima
गोमती नदी का प्राकृतिक चक्र = लक्ष्मी प्रतीक। तिजोरी में 11 (लाल कपड़ा) = धन वृद्धि। बुरी नजर निवारण। व्यापार वृद्धि। दीपावली: श्रीयंत्र+गोमती चक्र+कौड़ी। गंगाजल शुद्धि।
गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।
शंकराचार्य (788-820 ई.) ने 32 वर्ष में: अद्वैत — 'ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या, जीव = ब्रह्म'। प्रस्थानत्रयी पर भाष्य, भारतभर शास्त्रार्थ, 4 मठ (श्रृंगेरी, द्वारका, ज्योतिर्मठ, गोवर्धन), दर्जनों ग्रंथ। बौद्ध प्रभाव से वैदिक धर्म को पुनर्स्थापित किया।
आदि शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए — दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन (पुरी), पश्चिम में द्वारका और उत्तर में ज्योतिर्मठ। इन चार पीठों के प्रमुख को जगद्गुरु शंकराचार्य कहते हैं।
शंकराचार्य के अनुसार माया वह अनिर्वचनीय शक्ति है जो ब्रह्म के एकमात्र सत्य को आच्छादित करके जगत की मिथ्या प्रतीति कराती है। ज्ञान से ही माया का पर्दा हटता है।