विस्तृत उत्तर
आदि शंकराचार्य (लगभग 788-820 ई.) केरल के कालड़ी ग्राम में जन्मे और मात्र 32 वर्ष की आयु में हिंदू दर्शन को पुनर्स्थापित कर गए।
अद्वैत वेदांत स्थापना — कैसे
- 1दार्शनिक आधार:
- ▸मूल सिद्धांत — 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः' — ब्रह्म ही सत्य है, जगत मिथ्या (माया) है, जीव ब्रह्म से भिन्न नहीं।
- ▸प्रस्थानत्रयी (उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, गीता) पर भाष्य लिखे — ये अद्वैत वेदांत का बौद्धिक आधार बने।
- 1शास्त्रार्थ (दार्शनिक वाद-विवाद):
- ▸भारतभर में शास्त्रार्थ किए और बौद्ध, जैन, मीमांसक, सांख्य आदि दार्शनिकों को तर्क में परास्त किया।
- ▸मंडन मिश्र (मीमांसा विद्वान) से प्रसिद्ध शास्त्रार्थ — जीत के बाद मंडन मिश्र ने संन्यास लिया (सुरेश्वराचार्य बने)।
- 1चार मठों की स्थापना:
- ▸श्रृंगेरी मठ (दक्षिण — कर्नाटक) — सुरेश्वराचार्य
- ▸द्वारका/शारदा मठ (पश्चिम — गुजरात) — हस्तामलकाचार्य
- ▸ज्योतिर्मठ (उत्तर — उत्तराखंड) — तोटकाचार्य
- ▸गोवर्धन मठ (पूर्व — पुरी) — पद्मपादाचार्य
- ▸ये चार मठ भारत की चार दिशाओं में हिंदू धर्म के संरक्षक स्तंभ बने।
- 1ग्रंथ रचना:
- ▸ब्रह्मसूत्र भाष्य, उपनिषद भाष्य, गीता भाष्य — दार्शनिक
- ▸विवेकचूड़ामणि, आत्मबोध, उपदेशसाहस्री — प्रवचनात्मक
- ▸सौंदर्य लहरी, भज गोविंदम् — भक्तिपरक
- 1बौद्ध प्रभाव से हिंदू धर्म मुक्ति:
- ▸उस काल में बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ रहा था। शंकराचार्य ने वैदिक दर्शन को पुनर्स्थापित किया।
- ▸कुछ विद्वान उन्हें 'प्रच्छन्न बौद्ध' (disguised Buddhist) कहते हैं क्योंकि उनके माया सिद्धांत में बौद्ध शून्यवाद की छाया दिखती है — यह विवादित विषय है।
32 वर्ष में: भारतभर पदयात्रा, शास्त्रार्थ, 4 मठ स्थापना, दर्जनों ग्रंथ — यह मानव इतिहास की अद्भुत उपलब्धि है।





