विस्तृत उत्तर
स्वामी विवेकानंद (1863-1902) ने हिंदू धर्म और वेदांत दर्शन को विश्व मंच पर स्थापित किया।
मुख्य योगदान
- 1शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन (11 सितंबर 1893) — 'Sisters and Brothers of America' संबोधन से 7,000 श्रोताओं ने खड़े होकर कई मिनट तालियां बजाईं। हिंदू धर्म को विश्व ने पहली बार गंभीरता से सुना।
- 1वेदांत का सार्वभौमीकरण — विवेकानंद ने वेदांत को केवल भारतीय दर्शन नहीं बल्कि सार्वभौमिक सत्य के रूप में प्रस्तुत किया। 'एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति' (ऋग्वेद) — सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से कहते हैं।
- 1रामकृष्ण मिशन (1897) — सेवा और आध्यात्मिकता का संगठन। 'शिव ज्ञाने जीव सेवा' (प्रत्येक जीव में शिव देखकर सेवा)।
- 1पश्चिम में वेदांत केंद्र — अमेरिका और यूरोप में वेदांत सोसायटी स्थापित।
- 1युवा प्रेरणा — 'उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत' (कठोपनिषद 1.3.14) — उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।
- 1हिंदू आत्मविश्वास — औपनिवेशिक काल में जब हिंदू अपनी संस्कृति पर लज्जित थे, विवेकानंद ने गर्व का भाव जगाया।
प्रमुख विचार
- ▸'प्रत्येक आत्मा संभावित दिव्य है' — वेदांत का सार।
- ▸'धर्म = अनुभव, रूढ़ि नहीं।'
- ▸'मनुष्य सेवा = ईश्वर सेवा।'
- ▸'ताकत ही जीवन है, कमजोरी ही मृत्यु।'
ध्यान दें: विवेकानंद ने हिंदू धर्म का 'धर्मांतरण' नहीं किया — उन्होंने दर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी धर्मों की मान्यता दी और सार्वभौमिक सत्य की बात की।





