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गंगा आरती: 'ॐ जय गंगे माता', मूल पाठ, अर्थ और महिमा !
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गंगा आरती: 'ॐ जय गंगे माता', मूल पाठ, अर्थ और महिमा !

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माँ गंगा की आरती: 'ॐ जय गंगे माता' संपूर्ण मूल पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Aarti

माँ गंगा की आरती

1. माँ गंगा की आरती (मूल पाठ)

उपयोगकर्ता के अनुरोध के अनुसार, यहाँ माँ गंगा की आरती का सर्वाधिक प्रचलित और पारंपरिक मूल पाठ प्रस्तुत है। यह पाठ उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों (हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी, गढ़मुक्तेश्वर) में गाया जाता है।

।। श्री गंगा जी की आरती ।।
टेक (स्थायी): ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 1: चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 2: पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 3: एक ही बार जो तेरी, शरण गति आता । यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 4: आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता । दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥ ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता ॥

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