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गंगा आरती: 'ॐ जय गंगे माता', मूल पाठ, अर्थ और महिमा !
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गंगा आरती: 'ॐ जय गंगे माता', मूल पाठ, अर्थ और महिमा !

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अंतिम अपडेट: 8 जनवरी 2026
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माँ गंगा की आरती: ॐ जय गंगे माता | संपूर्ण मूल पाठ, अर्थ एवं आध्यात्मिक महिमा माँ गंगा की आरती: 'ॐ जय गंगे माता' संपूर्ण मूल पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Aarti माँ गंगा की आरती 1. माँ गंगा की आरती (मूल पाठ) उपयोगकर्ता के अनुरोध के अनुसार, यहाँ माँ गंगा की आरती का...

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माँ गंगा की आरती: 'ॐ जय गंगे माता' संपूर्ण मूल पाठ एवं महिमा | Shri Ganga Aarti

माँ गंगा की आरती

1. माँ गंगा की आरती (मूल पाठ)

उपयोगकर्ता के अनुरोध के अनुसार, यहाँ माँ गंगा की आरती का सर्वाधिक प्रचलित और पारंपरिक मूल पाठ प्रस्तुत है। यह पाठ उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों (हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी, गढ़मुक्तेश्वर) में गाया जाता है।

।। श्री गंगा जी की आरती ।।
टेक (स्थायी): ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 1: चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 2: पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 3: एक ही बार जो तेरी, शरण गति आता । यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता ॥
अंतरा 4: आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता । दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥ ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता ॥

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

दैनिक आचार

हिंदू धर्म में स्त्रियों के विशेष व्रत कौन से

प्रमुख: करवा चौथ (पति दीर्घायु), हरतालिका तीज (सुहाग), वट सावित्री (पति रक्षा), अहोई अष्टमी (संतान), नवरात्रि (देवी), गणगौर, छठ, सोलह सोमवार (विवाह)। श्रद्धा अनुसार; स्वास्थ्य सर्वोपरि।

दैनिक आचार

अविवाहित लड़की कौन कौन से व्रत रख सकती है

रख सकती: सोलह सोमवार (पति प्राप्ति), हरतालिका तीज, नवरात्रि, एकादशी, गणगौर, प्रदोष। नहीं (परंपरागत): करवा चौथ, वट सावित्री (केवल विवाहित)। अधिकांश व्रत सभी के लिए।

महिला एवं धर्म

सुहागन स्त्री पति लंबी उम्र के लिए कौन से व्रत

करवा चौथ, वट सावित्री (शास्त्रीय), हरतालिका तीज (निर्जल), सोलह सोमवार, गणगौर, अहोई अष्टमी। वट सावित्री+हरतालिका=सबसे शक्तिशाली। प्रेम=सच्चा व्रत।

तीर्थ एवं मोक्ष

गंगातट पर मृत्यु से मोक्ष का विधान क्या है?

गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।

लक्ष्मी पूजा सामग्री

लक्ष्मी पूजा में गोमती चक्र रखने का क्या लाभ है?

गोमती नदी का प्राकृतिक चक्र = लक्ष्मी प्रतीक। तिजोरी में 11 (लाल कपड़ा) = धन वृद्धि। बुरी नजर निवारण। व्यापार वृद्धि। दीपावली: श्रीयंत्र+गोमती चक्र+कौड़ी। गंगाजल शुद्धि।

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