विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण (जैमिनि ऋषि और पक्षियों का प्रख्यात संवाद) नैमित्तिक प्रलय के समय उत्पन्न होने वाले एकार्णव (Cosmic Ocean) की स्थिति का विशद वर्णन करता है। मार्कण्डेय पुराण में एक अत्यंत रहस्यमयी और दिलचस्प प्रसंग है — नैमित्तिक प्रलय के समय त्रैलोक्य के निवासी जलमग्न होने से पूर्व रक्षा के लिए महर्लोक की ओर भागते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि त्रैलोक्य के निवासियों की दृष्टि में महर्लोक अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान है। परन्तु विडंबना यह है कि महर्लोक के मूल निवासी (भृगु आदि महर्षि) संकर्षण की अग्नि के ताप से घबराकर स्वयं जनलोक की ओर पलायन करते हैं। मार्कण्डेय पुराण में यह भी वर्णन है कि एकार्णव का जल सप्तर्षि मंडल (ध्रुवलोक के समीप) तक पहुँच जाता है परंतु महर्लोक अपनी अत्यधिक ऊँचाई के कारण जलमग्न होने से बच जाता है।
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