विस्तृत उत्तर
भगवद्गीता (८.१६) में भगवान श्रीकृष्ण का यह कथन — आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन — महर्लोक के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस श्लोक का शाब्दिक अर्थ है — हे अर्जुन, ब्रह्मलोक (सत्यलोक) तक जाने वाले सभी लोक पुनरावर्ती हैं। आब्रह्मभुवनात् का अर्थ है ब्रह्मा के लोक (ब्रह्मलोक) तक। इस श्लोक में महर्लोक का स्पष्ट और प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है परंतु यह निश्चित है कि महर्लोक भी ब्रह्मलोक से नीचे के लोकों में आता है इसलिए यह गीता का सिद्धांत महर्लोक पर भी पूर्ण रूप से लागू होता है। यद्यपि महर्लोक एक अत्यंत पवित्र और सात्त्विक गंतव्य है और यहाँ के निवासियों की आयु एक कल्प की है तथापि यदि वे सत्यलोक तक की यात्रा तय करके ब्रह्मा जी के साथ मोक्ष प्राप्त नहीं करते तो उन्हें पुनः सृष्टि चक्र में आना पड़ सकता है। इसीलिए परमार्थ को जानने वाले भक्तियोगी सीधे वैकुण्ठ की प्राप्ति का ही लक्ष्य रखते हैं।
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