विस्तृत उत्तर
पाप और पुण्य आत्मा की यात्रा को उसके कर्मफल के अनुसार बदलते हैं। यदि जीव ने सत्कर्म किए हैं, तो उसे स्वर्ग या उच्च लोकों में भेजा जाता है। पुण्यात्माओं को यमपुरी के पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी द्वारों से सम्मानपूर्वक प्रवेश कराया जाता है। यदि जीव ने पाप किए हैं, तो उसे यमदूत दक्षिण द्वार से भीतर घसीटते हैं और पापों की गंभीरता के अनुसार विभिन्न नरकों में यातना दी जाती है। पापी जीव का पिण्डज शरीर यातना देह में परिवर्तित हो सकता है, जिससे वह यममार्ग और नरक के कष्ट अनुभव करता है। कर्मों का भोग पूरा होने के बाद आत्मा फिर जन्म-मृत्यु के चक्र में लौटती है।
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