विस्तृत उत्तर
रोज भागवत पढ़ने का बड़ा फल बताया गया है। सनकादि कहते हैं कि यदि परम गति की इच्छा हो तो मनुष्य अपने मुख से श्रीमद्भागवत का आधा या चौथाई श्लोक भी नित्य नियमपूर्वक पढ़े। जो व्यक्ति अर्थ सहित भागवत शास्त्र का दिन-रात पाठ करता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। जो नित्य भागवत का आधा या चौथाई श्लोक पढ़ता है, उसे राजसूय और अश्वमेध यज्ञ का पुण्य मिलता है। आगे नित्य भागवत पाठ को भगवान के चिंतन, तुलसी को सींचने और गौसेवा के समान कहा गया है। इसलिए स्रोत के अनुसार रोज भागवत पढ़ना पाप-नाश, पुण्य और हरि-संबंध का साधन है।
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