विस्तृत उत्तर
राजसूय यज्ञ में कृष्ण की पूजा इसलिए हुई क्योंकि वे सबके आत्मा प्रभु और सर्वोच्च सम्मान के योग्य माने गए। भीष्म याद करते हैं कि युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में मुनियों और बड़े-बड़े राजाओं से भरी सभा थी, और उस सभा में सबकी ओर से सबसे पहले कृष्ण की पूजा हुई। भीष्म कृष्ण को केवल पांडवों के मित्र या अर्जुन के सारथी नहीं देखते; वे उन्हें सबके दर्शनीय और सबके आत्मा प्रभु मानते हैं। मृत्यु के समय वही कृष्ण उनके सामने खड़े थे। इसलिए राजसूय की घटना भीष्म की दृष्टि में कृष्ण की सर्वमान्य, सर्वात्मा और पूज्य स्थिति दिखाती है। इस पूजा का केंद्र कृष्ण की वही महिमा है, जिसके कारण भीष्म मृत्यु के समय भी उन्हीं में मन स्थिर करते हैं।
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