विस्तृत उत्तर
युधिष्ठिर ने भीष्म के बाद राज्य धर्मपूर्वक संभाला। पहले उन्होंने भीष्म पितामह की अंतिम क्रिया कराई और कुछ समय शोक में रहे। फिर ऋषियों ने आनंदपूर्वक कृष्ण के रहस्यमय नामों से स्तुति की और कृष्णमय हृदय होकर अपने-अपने आश्रमों को लौट गए। इसके बाद युधिष्ठिर श्रीकृष्ण के साथ हस्तिनापुर गए। वहाँ उन्होंने अपने चाचा धृतराष्ट्र और तपस्विनी गांधारी को सांत्वना दी। बाद में धृतराष्ट्र की आज्ञा और कृष्ण की अनुमोदना से युधिष्ठिर ने अपने वंशपरंपरागत साम्राज्य का धर्मपूर्वक शासन संभाला। इस तरह भीष्म के बाद युधिष्ठिर का राज्य बुजुर्गों की आज्ञा, कृष्ण की स्वीकृति और धर्म के आधार पर स्थापित हुआ।
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