विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को कई प्रकार के धर्म बताए। उन्होंने वर्ण और आश्रम के अनुसार मनुष्य के स्वाभाविक धर्म समझाए। वैराग्य और राग के आधार पर निवृत्ति और प्रवृत्ति रूप दो धर्मों का वर्णन किया। फिर दानधर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, स्त्रीधर्म और भगवद्धर्म को अलग-अलग बताया। इसके साथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों तथा उनके साधनों की भी चर्चा की। भीष्म ने यह सब केवल सूची की तरह नहीं कहा; उन्होंने अनेक उपाख्यानों और इतिहासों के सहारे संक्षेप और विस्तार दोनों रूपों में समझाया। यह पूरा उपदेश युधिष्ठिर के धर्म-संशय को दूर करने और उन्हें राज्य-पालन के लिए स्थिर करने से जुड़ा था।
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