विस्तृत उत्तर
कृष्ण के स्वागत में द्वारका को बड़े उत्सव की तरह सजाया गया। नगर के फाटक, महलों के द्वार और सड़कों पर बंदनवार लगाए गए। चारों ओर चिह्नों वाले ध्वज और पताकाएं फहरा रही थीं, जिनसे मार्गों पर छाया-सी हो गई थी। राजमार्ग, छोटी-बड़ी सड़कें, बाजार और चौक अच्छी तरह झाड़-बुहारकर सुगंधित जल से सींचे गए। कृष्ण के स्वागत के लिए फल, फूल, अक्षत और अंकुर चारों ओर बिखेरे गए थे। हर घर के द्वार पर दही, अक्षत, फल, ईख, जल से भरे कलश, उपहार की वस्तुएं, धूप और दीप सजाए गए। यह सजावट बताती है कि द्वारका कृष्ण को केवल राजा की तरह नहीं, अपने प्रिय स्वामी की तरह स्वागत कर रही थी।
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