विस्तृत उत्तर
भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी रूप में इसलिए याद किया क्योंकि यह रूप कृष्ण की सेवा, करुणा और भक्तवत्सलता दिखाता है। अर्जुन की बात सुनकर कृष्ण ने दोनों सेनाओं के बीच रथ खड़ा किया और अपनी दृष्टि से शत्रु-पक्ष के सैनिकों की आयु हर ली। जब अर्जुन अपने स्वजनों का वध पाप समझकर युद्ध से विमुख हुआ, तब कृष्ण ने गीता के रूप में आत्मविद्या का उपदेश देकर उसका अज्ञान दूर किया। भीष्म ने वह छवि भी याद की जिसमें कृष्ण अर्जुन के रथ की रक्षा कर रहे थे; उनके बाएँ हाथ में घोड़ों की रास थी और दाएँ हाथ में चाबुक। युद्ध में मरने वाले वीर इसी पार्थसारथी रूप का दर्शन करते हुए उच्च गति को प्राप्त हुए।
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