विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह और कृष्ण की कथा में भीष्म कृष्ण को केवल पांडवों के संबंधी या मित्र नहीं, बल्कि साक्षात भगवान नारायण मानते हैं। वे युधिष्ठिर से कहते हैं कि कृष्ण सबके आदिकारण, परम पुरुष और सर्वात्मा हैं। युधिष्ठिर उन्हें अपना ममेरा भाई, प्रिय मित्र, मंत्री, दूत और सारथी मानते थे, पर भीष्म जानते थे कि वही परमात्मा हैं। भीष्म ने कहा कि कृष्ण समदर्शी हैं, फिर भी अनन्य भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं; इसी कृपा से वे भीष्म के प्राणत्याग के समय सामने आए। अपनी स्तुति में भीष्म ने कृष्ण को अर्जुन के सखा, पार्थसारथी, गीता उपदेशक और रथ का पहिया लेकर उनकी ओर दौड़ने वाले भक्तवत्सल भगवान के रूप में याद किया।
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