विस्तृत उत्तर
कुंती कृष्ण की स्तुति में पांडवों पर आई कई विपत्तियों को गिनाती है और हर जगह कृष्ण को ही रक्षक मानती है। वह कहती है कि कृष्ण ने जैसे देवकी को कंस के बंधन और शोक से मुक्त किया था, वैसे ही उसे और उसके पुत्रों को बार-बार संकटों से बचाया। वह विशेष रूप से विष से बचाने, लाक्षागृह की भयानक आग से बचाने, हिडिंब आदि राक्षसों से बचाने, द्यूतसभा की विपत्ति से बचाने, वनवास की कठिनाइयों से बचाने और युद्धों में अनेक महारथियों के शस्त्रों से बचाने का उल्लेख करती है। अंत में वह कहती है कि अभी-अभी अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से भी कृष्ण ने ही रक्षा की।
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