विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा पांडव वंश को बचाने से जुड़ी है। उत्तरा भयभीत होकर कृष्ण के पास आई और बोली कि दहकता हुआ लोहे का बाण उसकी ओर आ रहा है। उसने कृष्ण से प्रार्थना की कि वह बाण उसे भले जला दे, पर उसके गर्भ को नष्ट न करे। कृष्ण ने तुरंत समझ लिया कि अश्वत्थामा ने पांडवों को निर्बीज करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया है। पांडवों ने भी पांच तेजस्वी बाण अपनी ओर आते देखे। कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से अपने भक्तों की रक्षा की और उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया। ब्रह्मास्त्र कृष्ण के तेज के सामने शांत हो गया और परीक्षित बच गए।
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