विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण में कृष्ण का रूप अत्यंत सुंदर और दिव्य बताया गया है। द्वारका के लोग उन्हें नित्य देखते थे, फिर भी उनकी आँखें तृप्त नहीं होती थीं। उनके वक्षस्थल को मूर्तिमान सौंदर्य-लक्ष्मी का निवास कहा गया है। उनका मुख नेत्रों के लिए सौंदर्य-सुधा से भरा पात्र बताया गया है। उनकी भुजाएं लोकपालों को भी शक्ति देने वाली हैं और उनके चरणकमल भक्त परमहंसों का आश्रय हैं। जब वे द्वारका के राजपथ पर चल रहे थे, उनके ऊपर सफेद छत्र तना था, सफेद चंवर डुलाए जा रहे थे और चारों ओर से फूल बरस रहे थे। वे पीतांबर और वनमाला धारण किए हुए ऐसे शोभायमान थे जैसे श्याम मेघ सूर्य, चंद्रमा, इंद्रधनुष और बिजली से एक साथ सुशोभित हो।
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