विस्तृत उत्तर
कृष्ण के द्वारका लौटने का कोई अलग निजी कारण विस्तार से नहीं बताया गया है। युधिष्ठिर का राज्य स्थापित कराने और अश्वमेध यज्ञों के बाद कृष्ण ने वहाँ से जाने का विचार किया। उन्होंने पांडवों से विदा ली, व्यास आदि ब्राह्मणों का सत्कार किया और उनसे सम्मान पाया। फिर सात्यकि और उद्धव के साथ द्वारका जाने के लिए रथ पर बैठे। उसी समय उत्तरा भयभीत होकर उनके सामने दौड़ी आई और गर्भ रक्षा की प्रार्थना की। आगे, कुंती की स्तुति सुनकर कृष्ण ने उसे सांत्वना दी और हस्तिनापुर लौटे। जब वे फिर जाने लगे, तब युधिष्ठिर ने प्रेम से उन्हें रोक लिया।
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