विस्तृत उत्तर
युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञों का वर्णन कृष्ण द्वारा उनके राज्य की प्रतिष्ठा और यश विस्तार से जुड़ा है। पाठ कहता है कि कृष्ण ने युधिष्ठिर से उत्तम सामग्री और पुरोहितों के द्वारा तीन अश्वमेध यज्ञ कराए। इसका परिणाम यह बताया गया कि युधिष्ठिर का पवित्र यश सौ यज्ञ करने वाले इंद्र के यश की तरह सब ओर फैल गया। यहाँ इन यज्ञों का विस्तृत कर्मकांड नहीं बताया गया, बल्कि उनका फल और संदर्भ बताया गया है। पहले कृष्ण ने युधिष्ठिर को छल से छीना गया राज्य वापस दिलाया, फिर उनके द्वारा अश्वमेध यज्ञ कराकर उनके धर्मसम्मत यश को फैलाया।
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