महाभारतयक्ष-युधिष्ठिर संवाद क्या है?यक्ष-युधिष्ठिर संवाद वनपर्व का एक दार्शनिक प्रसंग है जिसमें यक्ष ने युधिष्ठिर से जीवन, धर्म और आश्चर्य पर प्रश्न पूछे। युधिष्ठिर ने सभी उत्तर दिए और चारों मूर्छित भाइयों को जीवित कराया। वह यक्ष वास्तव में यमराज थे।#यक्ष प्रश्न#युधिष्ठिर#धर्मराज
दिव्यास्त्रद्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया तो क्या हुआ?द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया लेकिन युधिष्ठिर ने अपने वरुणास्त्र से ही उसे निष्फल कर दिया, जो उनके अस्त्र ज्ञान का प्रमाण है।#द्रोणाचार्य
दिव्यास्त्रऔर कौन-कौन से योद्धाओं के पास वरुणास्त्र था?वरुणास्त्र के धारकों में द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर, सात्यकि, शिखंडी, रावण और वृषकेतु (कर्ण के पुत्र) शामिल थे।#वरुणास्त्र#धारक#युधिष्ठिर
महाभारतमहाभारत युद्ध के बाद क्या हुआ पांडवों का?युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने कुछ वर्ष राज किया, फिर परीक्षित को राज्य सौंपकर पाँचों पांडव और द्रौपदी महाप्रस्थान पर निकले। यात्रा में एक-एक करके सभी गिरते गए। केवल युधिष्ठिर स्वर्गद्वार तक पहुँचे और सशरीर स्वर्ग में प्रवेश किया।#पांडव#महाप्रस्थान#स्वर्गारोहण
लोकयक्ष ने पांडवों की परीक्षा क्यों ली?यक्ष ने पांडवों की धर्म-बुद्धि की परीक्षा ली; युधिष्ठिर के सही उत्तरों से संतुष्ट होकर उसने भाइयों को जीवित किया।#यक्ष परीक्षा#पांडव#युधिष्ठिर
लोकमय दानव ने मय सभा क्यों बनाई?अर्जुन द्वारा प्राणदान मिलने की कृतज्ञता में मय दानव ने युधिष्ठिर के लिए मय सभा बनाई।#मय सभा#मय दानव#अर्जुन
महाभारतद्युत सभा में द्रौपदी को दाँव क्यों लगाया गया?शकुनि की चाल में फँसे युधिष्ठिर ने सब कुछ हारने के बाद द्रौपदी को दाँव पर इसलिए लगाया क्योंकि शकुनि ने लालच दिया कि यदि वे जीते तो अपने सभी भाई और स्वयं को वापस पा लेंगे। यह उनकी महान भूल थी जो महाभारत के युद्ध का कारण बनी।#द्रौपदी#द्युत#युधिष्ठिर