विस्तृत उत्तर
यक्ष-युधिष्ठिर संवाद महाभारत के वनपर्व (अरण्यपर्व) का एक अत्यंत प्रसिद्ध और दार्शनिक प्रसंग है जो धर्म, जीवन और मनुष्य की प्रकृति पर गहन प्रकाश डालता है।
कथा इस प्रकार है: वनवास के दौरान पांडव किसी जलाशय के निकट आए। प्यास से व्याकुल द्रौपदी को जल लाने के लिए पहले सहदेव गए, फिर नकुल, अर्जुन और भीम — परंतु चारों ने जल लेने से पहले जलाशय के स्वामी यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार किया और जल पीते ही बेहोश होकर गिर पड़े। अंत में युधिष्ठिर स्वयं गए। यक्ष को देखकर उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा — 'आप प्रश्न करें, मैं उत्तर दूँगा।'
यक्ष ने अनेक प्रश्न पूछे जैसे: सूर्य को कौन उदित करता है? (ब्रह्म), संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? युधिष्ठिर ने कहा — 'प्रतिदिन हजारों जीव यमलोक जाते हैं, फिर भी बचे लोग समझते हैं कि हम अमर हैं — यही सबसे बड़ा आश्चर्य है।' सुखी मनुष्य कौन है? — 'जो ऋणी नहीं, विदेश में नहीं और जो अपने घर में संतोष से रहता है।' जीवन का मार्ग क्या है? — 'जो महापुरुषों के मार्ग पर चलता है।'
जब यक्ष ने पूछा कि मैं चार में से एक भाई को जीवित करूँगा, किसे करूँ — युधिष्ठिर ने कहा — 'नकुल को, क्योंकि माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहना चाहिए।' युधिष्ठिर की इस निष्पक्षता और धर्मनिष्ठा से प्रसन्न होकर यक्ष ने सभी चारों भाइयों को जीवित कर दिया। वह यक्ष स्वयं धर्मराज यमराज थे जो अपने पुत्र की परीक्षा लेने आए थे।





