विस्तृत उत्तर
पुराणों के अनुसार यमराज की उत्पत्ति अत्यंत दिव्य है। वे सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र हैं। उन्हें दक्षिण दिशा का दिक्पाल और पितरों का स्वामी नियुक्त किया गया। उनका कार्य केवल प्राण हरना नहीं, बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय करना भी है। वे केवल मृत्यु के दूत नहीं बल्कि ब्रह्मांडीय विधान के निष्पक्ष न्यायाधीश हैं। न्याय के इस महान कार्य के कारण ही उन्हें 'धर्मराज' की उपाधि प्राप्त है। इसी महान कार्य को करने के लिए उन्हें कालदण्ड प्रदान किया गया।
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