विस्तृत उत्तर
महाभारत के द्रोण पर्व में इसका एक अत्यंत सजीव उदाहरण मिलता है। जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में संशप्तक योद्धाओं ने अर्जुन को चारों ओर से घेर लिया और उन पर बाणों की ऐसी वर्षा की कि स्वयं श्रीकृष्ण भी अर्जुन को स्पष्ट रूप से देख पाने में कठिनाई अनुभव करने लगे, तब अर्जुन ने वायव्यास्त्र का आह्वान किया। इस अस्त्र के प्रभाव से प्रचंड वायु प्रवाहित हुई जिसने न केवल बाणों की वर्षा को रोक दिया बल्कि शत्रु सेना के घोड़ों, रथों और योद्धाओं को सूखे पत्तों की भांति उड़ा दिया। युद्धभूमि रक्त और मृत शरीरों से पट गई जो वायव्यास्त्र की विनाशकारी क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
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