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विस्तृत उत्तर
कर्ण का एकमात्र इरादा इस शक्ति को अपने और अर्जुन के बीच होने वाले अंतिम और निर्णायक युद्ध के लिए बचाकर रखना था। यह उसका तुरुप का इक्का था, जो अर्जुन के विशाल शस्त्रागार के विरुद्ध अंतिम बराबरी का हथियार था। दुर्योधन सहित कौरव पक्ष के सभी योद्धा उसे लगातार इसी उद्देश्य के लिए इसे संरक्षित रखने की याद दिलाते रहते थे।
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