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विस्तृत उत्तर
वासवी शक्ति की शर्तों का पालन न करने पर यह शक्ति स्वयं चलाने वाले पर ही चल जाती। अर्थात् यदि कर्ण इसे तब चलाता जब उसके प्राण घोर संकट में न हों या अन्य सभी अस्त्र-शस्त्र विफल न हुए हों, तो यह अमोघ अस्त्र उसी को नष्ट कर देता। यह शर्त इस अस्त्र को और अधिक जटिल और दोधारी बनाती थी क्योंकि इसका प्रयोग जितना शत्रु के लिए घातक था, उतना ही गलत समय पर प्रयोग करने पर स्वयं के लिए भी।
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