विस्तृत उत्तर
कर्ण के अभूतपूर्व त्याग और दानवीरता से प्रभावित और कुछ हद तक लज्जित होकर इंद्र ने उसे अपनी वासवी शक्ति प्रदान की। सूर्य देव ने पहले ही कर्ण को सलाह दी थी कि यदि ऐसी स्थिति आए तो वह बदले में एक अमोघ अस्त्र की मांग करे। इस प्रकार यह दिव्य 'उपहार' वास्तव में इंद्र द्वारा अपने छल के अधर्म को कम करने के लिए चुकाई गई एक कीमत थी। यह देवताओं के बीच भी मानवीय प्रेरणाओं और रणनीतिक सौदेबाजी को दर्शाता है जहाँ वरदान भी शुद्ध परोपकार से नहीं बल्कि आवश्यकता और विवशता से पैदा होते हैं।
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