विस्तृत उत्तर
आने वाले युद्ध में अपने पुत्र अर्जुन के जीवन को लेकर देवराज इंद्र चिंतित थे क्योंकि वे जानते थे कि कवच-कुंडल धारी कर्ण को पराजित करना असंभव है। भगवान कृष्ण की रणनीतिक सलाह पर इंद्र ने कर्ण को उसकी दिव्य सुरक्षा से वंचित करने की योजना बनाई। उन्होंने एक वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण कर कर्ण के पास पहुँचकर भिक्षा में उसके कवच और कुंडल मांग लिए। इस प्रकार इंद्र का यह कार्य एक पिता के पुत्र-प्रेम से प्रेरित सुनियोजित छल था।
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