विस्तृत उत्तर
गुरु द्रोणाचार्य ने नारायणास्त्र का ज्ञान अपने पुत्र अश्वत्थामा को दिया। कुछ संदर्भ यह भी इंगित करते हैं कि द्रोणाचार्य ने अर्जुन को भी इसका ज्ञान दिया था हालांकि महाभारत में अश्वत्थामा द्वारा इसके प्रयोग का वृत्तांत अधिक प्रमुखता से मिलता है। द्रोणाचार्य द्वारा अपने पुत्र अश्वत्थामा को यह अस्त्र देना संभवतः पुत्र मोह का भी एक संकेत है क्योंकि अश्वत्थामा में अर्जुन जैसा संयम और दूरदर्शिता नहीं थी जैसा कि महाभारत की बाद की घटनाओं से स्पष्ट होता है।
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