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द्रोणाचार्य प्रश्नोत्तरी — 15 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित द्रोणाचार्य विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 15 प्रश्न

दिव्यास्त्र

अश्वत्थामा को वायव्यास्त्र कहाँ से मिला?

अश्वत्थामा को वायव्यास्त्र का ज्ञान अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य से विरासत में मिला था।

अश्वत्थामावायव्यास्त्रद्रोणाचार्य
दिव्यास्त्र

अर्जुन को वायव्यास्त्र कैसे मिला?

अर्जुन को वायव्यास्त्र दो स्रोतों से मिला — गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा के रूप में, और वनवास काल में देवलोक जाकर पवन देव से सीधी दीक्षा के रूप में।

अर्जुनवायव्यास्त्रद्रोणाचार्य
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य ने नारायणास्त्र किसे दिया?

द्रोणाचार्य ने नारायणास्त्र मुख्य रूप से अपने पुत्र अश्वत्थामा को दिया। कुछ मतों के अनुसार अर्जुन को भी इसका ज्ञान दिया था।

द्रोणाचार्यनारायणास्त्रअश्वत्थामा
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य को नारायणास्त्र कैसे मिला?

द्रोणाचार्य को नारायणास्त्र उनके पिता ऋषि भारद्वाज से मिला था जिन्हें यह भगवान नारायण की कृपा से प्राप्त हुआ था।

द्रोणाचार्यनारायणास्त्रभारद्वाज
अस्त्र शस्त्र

द्रोणाचार्य ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र क्यों दिया?

द्रोण ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र इसलिए दिया क्योंकि अर्जुन सर्वश्रेष्ठ शिष्य थे और द्रोण का वचन था कि अर्जुन से बड़ा धनुर्धर कोई नहीं होगा। यह अस्त्र उन्हें परशुराम से मिला था।

ब्रह्मास्त्रद्रोणाचार्यअर्जुन
दिव्यास्त्र

अश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान कहाँ से मिला?

अश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य से प्राप्त हुआ था। यह उनके विशाल दिव्यास्त्र संग्रह का हिस्सा था।

अश्वत्थामापर्जन्यास्त्रद्रोणाचार्य
शिव अवतार कथा

अश्वत्थामा शिव के किस अवतार का अंश है

अश्वत्थामा शिव के 'सवन्तिक रुद्र' अंशावतार हैं। द्रोणाचार्य की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने सवन्तिक रुद्र के अंश से उनके पुत्र रूप में जन्म लिया। जन्म से मस्तक में दिव्य मणि थी जो उन्हें अजेय बनाती थी।

अश्वत्थामासवन्तिक रुद्रद्रोणाचार्य
अस्त्र शस्त्र

द्रोणाचार्य के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

द्रोणाचार्य के पास परशुराम से प्राप्त संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र ज्ञान था — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, आंगिरस धनुष सहित सभी प्रमुख दिव्यास्त्र।

द्रोणाचार्यअस्त्रपरशुराम
दिव्यास्त्र

अर्जुन को अंतर्धान अस्त्र किन दो स्रोतों से मिला?

अर्जुन को अंतर्धान अस्त्र दो स्रोतों से मिला — गुरु द्रोणाचार्य से और देवता कुबेर से। यह दोहरा शिक्षण उनकी पूर्ण महारत का प्रतीक है।

अर्जुनअंतर्धान अस्त्रद्रोणाचार्य
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र कहाँ से मिला?

द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र की शिक्षा महर्षि अग्निवेश से प्राप्त हुई थी। यह ज्ञान आगे द्रोणाचार्य से अर्जुन और अश्वत्थामा तक पहुंचा।

द्रोणाचार्यआग्नेयास्त्रमहर्षि अग्निवेश
दिव्यास्त्र

द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया लेकिन युधिष्ठिर ने अपने वरुणास्त्र से ही उसे निष्फल कर दिया, जो उनके अस्त्र ज्ञान का प्रमाण है।

द्रोणाचार्ययुधिष्ठिरवरुणास्त्र
दिव्यास्त्र

और कौन-कौन से योद्धाओं के पास वरुणास्त्र था?

वरुणास्त्र के धारकों में द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर, सात्यकि, शिखंडी, रावण और वृषकेतु (कर्ण के पुत्र) शामिल थे।

वरुणास्त्रधारकयुधिष्ठिर
दिव्यास्त्र

अर्जुन को वरुणास्त्र कैसे मिला?

अर्जुन को वरुणास्त्र दो स्रोतों से मिला — गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा के रूप में, और स्वयं वरुण देव से।

अर्जुनवरुणास्त्रद्रोणाचार्य
अस्त्र शस्त्र

अस्त्र विद्या किससे सीखी जाती थी?

अस्त्र विद्या परशुराम (सर्वश्रेष्ठ गुरु), द्रोणाचार्य, शिव-इंद्र-यम जैसे देवताओं से सीखी जाती थी। गुरु पात्रता देखते थे — शारीरिक बल नहीं, मन-आत्मा की शुद्धि जरूरी थी।

अस्त्र विद्यागुरु परशुरामद्रोणाचार्य
महाभारत

अभिमन्यु चक्रव्यूह में कैसे फँसा?

तेरहवें दिन अर्जुन के दूर जाने पर द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह बनाया। अभिमन्यु व्यूह में घुसना जानते थे पर निकलना नहीं। अकेले छः परतें तोड़ने के बाद जयद्रथ ने शेष पांडवों को रोक दिया और कौरव महारथियों ने घेरकर अधर्मपूर्वक अभिमन्यु का वध किया।

अभिमन्युचक्रव्यूहजयद्रथ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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