ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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व्रत उपवास विधि

व्रत कैसे रखें, एकादशी व्रत नियम, नवरात्रि व्रत, सोमवार व्रत — सम्पूर्ण व्रत विधि प्रश्नोत्तर।

80प्रश्नोत्तर
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बरगद पेड़ की पूजा — वट सावित्री व्रत में?

वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।

व्रत विधिवट सावित्रीबरगद
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नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का नियम क्या है — बुझ जाए तो क्या करें?

घी/तेल, 9 दिन निरंतर, हवा से बचाव। प्रतिदिन घी डालें। बुझ जाए: तुरंत पुनः जलाएं + क्षमा प्रार्थना + मंत्र 3 बार। देवी नाराज नहीं — भक्ति प्रधान।

नवरात्रिअखंड ज्योतिनियम
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चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में पूजा का क्या अंतर है?

चैत्र: वसंत, नववर्ष, सौम्य देवी, राम नवमी। शारदीय: शरद, उग्र देवी, दशहरा/रावण दहन, बंगाल दुर्गा पूजा। पूजा विधि समान — घटस्थापना, 9 दिन, सप्तशती।

नवरात्रिचैत्रशारदीय
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नवरात्रि में कन्या पूजन की विधि और कितनी कन्याओं की पूजा करें?

9 कन्या सर्वोत्तम (नवदुर्गा)। 7/5/2+1/1 भी मान्य। आयु 2-10 वर्ष। विधि: चरण धोएं → तिलक → चुनरी+श्रृंगार → हलवा-पूरी-चना+खीर → दक्षिणा → प्रणाम। अष्टमी/नवमी।

नवरात्रिकन्या पूजननवमी
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रामनवमी पर व्रत कैसे रखें?

रामनवमी व्रत में प्रातः स्नान, सूर्य को अर्घ्य, संकल्प और दोपहर को श्रीराम की विशेष पूजा करें। अन्न का त्याग कर फलाहार करें। रामरक्षास्तोत्र और रामचरितमानस का पाठ करें।

व्रत एवं त्योहाररामनवमीव्रत विधि
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देवी की पूजा में अष्टमी और नवमी का क्या विशेष महत्व है?

अष्टमी: देवी शक्ति सर्वोच्च, संधि पूजा, हवन, रक्तबीज वध। नवमी: कन्या पूजन (9=9 देवी), पूर्णाहुति, वरदान अध्याय। दोनों = नवरात्रि चरमोत्कर्ष — 2 दिन = 9 दिन फल।

नवरात्रिअष्टमीनवमी
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विश्वकर्मा पूजा कब और कैसे होती है?

विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) को होती है। इस दिन मशीनों-औजारों की सफाई और पूजा की जाती है। प्रतिमा स्थापित कर पुष्प-धूप-दीप से पूजन और आरती होती है।

व्रत एवं त्योहारविश्वकर्मा पूजा17 सितंबर
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गोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्या है?

अन्नकूट का अर्थ है 'अन्न का पर्वत।' गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन भूखे रहने के बाद ब्रजवासियों ने कृष्ण को 7 दिन × 8 पहर = 56 प्रकार के व्यंजन खिलाए — यही छप्पन भोग की परंपरा है। इसे अन्नकूट कहते हैं।

व्रत एवं त्योहारगोवर्धन पूजाअन्नकूट
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भाई दूज क्यों मनाते हैं?

भाई दूज इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन के लिए गए थे। यमुना के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के हाथों तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं होगा।

व्रत एवं त्योहारभाई दूजयम द्वितीया
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नरक चतुर्दशी की कथा क्या है?

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और 16 हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी की खुशी में दीप जलाए गए और यह पर्व मनाया जाने लगा।

व्रत एवं त्योहारनरक चतुर्दशीनरकासुर
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धनतेरस पर सोना-चाँदी क्यों खरीदते हैं?

धनतेरस पर सोना-चाँदी इसलिए खरीदते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। सोना लक्ष्मी का प्रतीक है, और इस दिन धातु खरीदना लक्ष्मी-कुबेर-धन्वंतरि तीनों की कृपा का माध्यम माना जाता है।

व्रत एवं त्योहारधनतेरससोना
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दीपावली पर पाँच दिन कौन-कौन से त्योहार हैं?

दीपावली के पाँच दिन हैं: धनतेरस (धन्वंतरि पूजा), नरक चतुर्दशी (नरकासुर वध स्मृति), दीपावली (लक्ष्मी-गणेश पूजन), गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), और भाई दूज (यम द्वितीया)।

व्रत एवं त्योहारदीपावलीधनतेरस
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छठ पूजा में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

छठ में दो अर्घ्य होते हैं — तीसरे दिन संध्या में डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को। बाँस के सूप में प्रसाद सजाकर, जल में खड़े होकर तांबे के लोटे से जल-दूध मिश्रित अर्घ्य दिया जाता है। 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र के साथ हाथ सिर के ऊपर रखकर सूर्य को अर्पण किया जाता है।

व्रत एवं त्योहारछठ पूजाअर्घ्य
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अधिकमास में पूजा का क्या महत्व है?

अधिकमास में पूजा-जप-दान का फल दस गुना मिलता है क्योंकि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस मास के अधिपति हैं। विष्णु-कृष्ण पूजा, दीपदान, भागवत पाठ और तीर्थ यात्रा विशेष रूप से फलदायी हैं। मांगलिक कार्य वर्जित हैं लेकिन साधना के लिए यह मास सर्वश्रेष्ठ है।

व्रत एवं त्योहारअधिकमासपुरुषोत्तम मास
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श्रावण मास में क्या खाना वर्जित है?

श्रावण में मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी), प्याज-लहसुन, बैंगन, कच्चा दूध-दही, कढ़ी और नशीले पदार्थ वर्जित हैं। शास्त्र और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सात्विक भोजन का पालन करना इस मास का विशेष नियम है।

व्रत एवं त्योहारश्रावणसावन
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करवाचौथ व्रत पहली बार कैसे करें?

सूर्योदय से पहले सरगी लें। सोलह श्रृंगार करें। शाम को करवाचौथ माता की पूजा, कथा श्रवण और करवा बदलने की रस्म करें। रात को छलनी से चाँद और पति का मुख देखें, अर्घ्य दें और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

व्रत एवं त्योहारकरवाचौथपहली बार व्रत
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करवाचौथ में चाँद देखने के बाद क्या करें?

चाँद उगने पर छलनी से पहले चंद्रमा देखें, फिर पति का मुख। करवे से चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें। पति के पैर छूएं, उनके हाथ से जल पिएं और प्रसाद ग्रहण करें — इससे व्रत का पारण होता है।

व्रत एवं त्योहारकरवाचौथचाँद अर्घ्य
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अहोई अष्टमी की कथा कौन सी है?

साहूकार की बहू के हाथों अनजाने में सेही का बच्चा मर गया, जिससे उसकी संतानें मरने लगीं। वृद्धाओं की सलाह पर उसने कार्तिक अष्टमी को सेही का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा और क्षमायाचना की। माता की कृपा से उसे फिर सात पुत्र मिले।

व्रत एवं त्योहारअहोई अष्टमी कथासेही की कथा
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अहोई अष्टमी व्रत की विधि

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माताएं संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। दीवार पर सेही का चित्र बनाएं, सायंकाल पूजा करें, कथा सुनें और तारे उगने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

व्रत एवं त्योहारअहोई अष्टमीव्रत विधि
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संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में अंतर

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी में रात्रि को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है, जो इसकी मुख्य विशेषता है। मंगलवार की संकष्टी को अंगारकी कहते हैं।

व्रत एवं त्योहारसंकष्टी चतुर्थीविनायक चतुर्थी
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गणेश चतुर्थी व्रत की विधि

गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मूर्ति स्थापना, पंचामृत स्नान, दूर्वा, मोदक, लाल फूल, धूप-दीप, कथा और आरती मुख्य अंग हैं। इस दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।

व्रत एवं त्योहारगणेश चतुर्थीविनायक चतुर्थी
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हरतालिका तीज की कथा

माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। सखी ने उन्हें वन में छुपाया (हरतालिका = हरण + सखी)। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाकर जागरण किया और शिव ने प्रकट होकर उनकी कामना पूरी की। इसी घटना की स्मृति में यह व्रत होता है।

व्रत एवं त्योहारहरतालिका तीज कथापार्वती शिव कथा
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हरतालिका तीज की पूजा सामग्री

हरतालिका तीज पूजा सामग्री में गीली मिट्टी (प्रतिमा के लिए), पंचामृत, केले के पत्ते, बेलपत्र, धूप-दीप, पान-सुपारी, नारियल, और माता पार्वती के लिए सिंदूर-चूड़ी-मेहंदी सहित सोलह श्रृंगार की वस्तुएं शामिल हैं।

व्रत एवं त्योहारहरतालिका तीजपूजा सामग्री
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हरियाली तीज व्रत कैसे करें?

हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को होती है। सोलह श्रृंगार, हरे वस्त्र, प्रदोष काल में गणेश-शिव-पार्वती पूजा, कथा श्रवण, झूला और मेहंदी इसके मुख्य अंग हैं। निर्जला व्रत रखकर अगले दिन पारण करें।

व्रत एवं त्योहारहरियाली तीजश्रावणी तीज
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हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने का क्या विशेष फल है?

हरतालिका निर्जला: पार्वती तप अनुसरण, अखण्ड सौभाग्य (करवा चौथ से कठिन=फल अधिक), शिव-पार्वती कृपा (दाम्पत्य+संतान), पापक्षय, अगले जन्म सौभाग्य। स्वास्थ्य सर्वोपरि — जल छूट।

व्रत विधिहरतालिका तीजनिर्जला
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कार्तिक स्नान कितने बजे करना चाहिए?

कार्तिक स्नान: ब्रह्म मुहूर्त (4:00-4:30) सर्वोत्तम, अरुणोदय (5:00-5:30) उत्तम, सूर्योदय (6:00-6:30) मध्यम। अंतिम=सूर्योदय+1 घण्टा। ठंडा जल=तप। 30 दिन निरंतर।

व्रत विधिकार्तिक स्नानसमय
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श्रावण मास में मांसाहार का त्याग क्यों करते हैं?

श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।

व्रत विधिश्रावणमांसाहार
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एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं?

एकादशी जल: हाँ — 23 एकादशियों में पानी अनुमत। केवल निर्जला (ज्येष्ठ शुक्ल) = जल वर्जित। अन्न वर्जित, जल-फल-दूध अनुमत। स्वास्थ्य सर्वोपरि।

व्रत विधिएकादशीपानी
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हरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?

बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।

व्रत विधिहरतालिका तीजबालू
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पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?

सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।

व्रत विधिसत्यनारायणपूर्णिमा
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कार्तिक मास में कार्तिक स्नान का क्या विशेष लाभ है?

कार्तिक स्नान: सर्वाधिक पुण्य मास (पद्म पुराण), विष्णु प्रिय (श्रावण=शिव), ब्रह्म मुहूर्त ठंडा जल=तप, तुलसी+दीपदान। ब्रह्म मुहूर्त→स्नान→तुलसी→विष्णु जप→दीपदान। 30 दिन निरंतर। पाप क्षय+मोक्ष।

व्रत विधिकार्तिक स्नानकार्तिक मास
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देवशयनी एकादशी से देवउठनी तक शुभ कार्य क्यों नहीं करते?

चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।

व्रत विधिचातुर्मासदेवशयनी
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निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन क्यों माना जाता है?

निर्जला कठिन: जल भी वर्जित (24 घण्टे), ज्येष्ठ=भीषण गर्मी (40-48°C), भीम कथा (महाबली भी कठिन), 24 एकादशी=1 निर्जला (फल=कठिनता दोनों सर्वाधिक)। केवल आचमन। स्वास्थ्य सर्वोपरि।

व्रत विधिनिर्जलाकठिन
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एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

चावल वर्जित: पद्म पुराण — पाप पुरुष अन्न/चावल में छिपा। चावल=जल तत्व/तमोगुण (एकादशी=सत्त्व), चन्द्र सम्बद्ध, कफकारक (शुद्धि बाधक)। सभी अन्न वर्जित। विकल्प: कुट्टू, साबूदाना, फल, दूध, समा चावल।

व्रत विधिएकादशीचावल
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नवरात्रि व्रत के दौरान क्या खा सकते हैं?

नवरात्रि व्रत आहार: कुट्टू, साबूदाना, सिंघाड़ा, राजगिरा आटा, समा चावल, फल, दूध-दही-पनीर, मेवे-मखाने, आलू-शकरकंद-कद्दू। सेंधा नमक ही। वर्जित: चावल, गेहूँ, दालें, प्याज, लहसुन, मांस, सामान्य नमक। कुल परम्परानुसार।

व्रत विधिनवरात्रि भोजनव्रत आहार
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परमा एकादशी का व्रत किस उद्देश्य से रखें?

परमा एकादशी: अधिक/पुरुषोत्तम मास शुक्ल एकादशी (2.5-3 वर्ष में एक बार)। उद्देश्य: सर्वपाप नाश, सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य, मोक्ष कामना। अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास — सर्व पुण्य कर्म अनेकगुना फल।

व्रत विधिपरमा एकादशीअधिक मास
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अनंत चतुर्दशी पर अनंत धागा बांधने की विधि क्या है?

अनंत धागा: हल्दी रंगा सूत/रेशम → 14 गाँठ (प्रति गाँठ 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय') → विष्णु पूजन → 'अनन्त संसारमहासमुद्रे...' मंत्र → पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ → 14 वर्ष व्रत → उद्यापन। 14 गाँठ = 14 भुवन।

व्रत विधिअनंत चतुर्दशीअनंत सूत्र
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वामन द्वादशी पर पूजा कैसे करें?

वामन द्वादशी: भाद्रपद शुक्ल 12। वामन अवतार = बलि से तीन पग दान। विधि: वामन प्रतिमा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वामनाय' → कथा पाठ → छत्र (छाता) दान विशेष → ब्राह्मण बालक पूजन-भोज। दान = बलि की महिमा।

व्रत विधिवामन द्वादशीभाद्रपद शुक्ल द्वादशी
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प्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?

प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।

व्रत विधिप्रबोधिनी एकादशीदेवउठनी
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हरिशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा कैसे करें?

हरिशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा आरम्भ, चातुर्मास प्रारम्भ (4 माह शुभ कार्य वर्जित)। विधि: विष्णु शयन सज्जा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 1008 जप → चातुर्मास संकल्प → दान। प्रबोधिनी तक विष्णु सोते हैं।

व्रत विधिहरिशयनी एकादशीदेवशयनी
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विजया एकादशी व्रत कैसे रखें?

विजया एकादशी: फाल्गुन कृष्ण एकादशी। श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व रखी थी। विजय प्रदायिनी। विधि: दशमी शाम भोजन → एकादशी निर्जला/फलाहार → विष्णु पूजा-जप → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। कोर्ट/परीक्षा/प्रतिस्पर्धा हेतु विशेष।

व्रत विधिविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशी
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श्रावण मास के व्रत और नियम क्या हैं

श्रावण नियम: प्रत्येक सोमवार शिव व्रत + शिवलिंग जलाभिषेक। मंगलवार = मंगला गौरी। नाग पंचमी, हरियाली तीज, रक्षाबन्धन। नित्य 'ॐ नमः शिवाय' जप, बिल्वपत्र, कांवड़ यात्रा। साग त्याग, सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य। शिव का सबसे प्रिय मास।

व्रतश्रावणसावन
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मोहिनी एकादशी का क्या विशेष महत्व है?

मोहिनी एकादशी: वैशाख शुक्ल एकादशी। विशेष: विष्णु मोहिनी अवतार दिवस (समुद्र मंथन)। मोह-माया नाश। मेरुपर्वत सम पाप क्षय। सहस्र गोदान फल। कथा: धृष्टबुद्धि → कौण्डिन्य ऋषि → व्रत → विष्णुधाम। वर्ष की श्रेष्ठतम एकादशियों में।

व्रत विधिमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशी
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वैशाख मास में दान का क्या विधान है

वैशाख दान: सर्वोत्तम दान मास। जलदान (प्रमुख — ग्रीष्म), सत्तू, छाता, पंखा, जूता-चप्पल, फल। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल 3) = अक्षय फल। बुद्ध पूर्णिमा। 'वैशाखे...तत्सर्वमक्षयं' — वैशाख दान = अक्षय। पद्मपुराण, स्कन्दपुराण में माहात्म्य।

व्रत एवं पर्ववैशाखदान
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कामिका एकादशी व्रत कैसे रखें

कामिका एकादशी: श्रावण कृष्ण एकादशी। दशमी एक-समय भोजन → एकादशी निराहार/फलाहार → विष्णु पूजा (तुलसी विशेष) → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। तुलसी = सहस्र गोदान पुण्य। शिव+विष्णु कृपा।

एकादशीकामिका एकादशीश्रावण
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माघ मास में स्नान का क्या विशेष महत्व है

माघ स्नान: मत्स्यपुराण — माघ नित्य स्नान = सर्वतीर्थ + सर्वयज्ञ फल। कल्पवास: प्रयागराज में 1 मास, 3 बार स्नान। मकर संक्रान्ति, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा विशेष। ब्रह्म मुहूर्त में ठण्डे जल में = तप। सर्वपापनाश, मोक्ष मार्ग।

व्रत एवं पर्वमाघस्नान
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पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे रखें

पुत्रदा एकादशी: श्रावण/पौष शुक्ल एकादशी = सन्तान प्राप्ति हेतु। निराहार/फलाहार → विष्णु/बालकृष्ण पूजा → सन्तान गोपाल मंत्र → कथा → जागरण → द्वादशी पारण। कथा: सन्तानहीन राजा महीजित को व्रत से पुत्र प्राप्ति। दम्पति साथ करें।

एकादशीपुत्रदा एकादशीश्रावण
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पापमोचनी एकादशी का क्या महत्व है

पापमोचनी एकादशी: चैत्र कृष्ण एकादशी = सर्वपापनाशिनी। जो पाप अन्य उपायों से न मिटें, वे भी नष्ट। कथा: मेधावी मुनि तपोभ्रष्ट → व्रत से मुक्ति। विष्णु पूजा + जप + कथा + जागरण। होली बाद प्रायश्चित भी। पद्मपुराण में माहात्म्य।

एकादशीपापमोचनी एकादशीचैत्र
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अमावस्या को पूजा करने का क्या विशेष विधान है

अमावस्या पूजा: पितृ तर्पण (तिल-जल, दक्षिण मुख) प्रमुख। श्राद्ध, गाय-कौवे-कुत्ते को भोजन। शनिश्चरी = शनि पूजा + पीपल। दान + ब्राह्मण भोजन। शुभ कार्य वर्जित। विशेष: सोमवती, शनिश्चरी, सर्वपितृ, माघ अमावस्या।

व्रतअमावस्यापितृ
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अनंत चतुर्दशी व्रत की विधि क्या है?

अनंत चतुर्दशी: भाद्रपद शुक्ल 14। विधि: 14 गाँठ पीला धागा (अनंत सूत्र) → शेषनाग/अनंत विष्णु पूजन → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा श्रवण → सूत्र बंधन (पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ)। 14 वर्ष व्रत। गणेश विसर्जन दिवस।

व्रत विधिअनंत चतुर्दशीविष्णु
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अहोई अष्टमी व्रत कैसे रखें विधि सहित?

अहोई अष्टमी: कार्तिक कृष्ण अष्टमी (करवा चौथ + 4 दिन)। विधि: निर्जला/फलाहार → अहोई माता (सेही) चित्र → संध्या पूजन-कथा → तारे/चन्द्र देखकर अर्घ्य → व्रत पारण। संतान रक्षा-दीर्घायु हेतु। उत्तर भारत प्रचलित।

व्रत विधिअहोई अष्टमीसंतान रक्षा
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चातुर्मास में क्या क्या नियम पालन करने चाहिए

चातुर्मास नियम: सावन = साग त्याग, भाद्रपद = दही, आश्विन = दूध, कार्तिक = दाल। शुभ/मांगलिक कार्य वर्जित। भक्ति: एकादशी व्रत, गीता/विष्णु सहस्रनाम। दान अवश्य। ब्रह्मचर्य, भूमि शयन, सादा भोजन, वाणी संयम। मूल भावना: संयम + भक्ति + आत्मशुद्धि।

व्रत एवं पर्वचातुर्मासनियम
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पूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करें

पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।

व्रतपूर्णिमाव्रत
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कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान है

कार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।

व्रत एवं पर्वकार्तिकस्नान
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सोमवती अमावस्या का व्रत कैसे रखें

सोमवती अमावस्या = सोमवार + अमावस्या। व्रत: स्नान → उपवास → पीपल की 108 परिक्रमा (कच्चा सूत) → शिव पूजा → पितृ तर्पण → दान। सुहागिनों के लिए विशेष (पति दीर्घायु)। पितृ/शनि दोष निवारण। वर्ष में 2-3 बार — दुर्लभ।

व्रतसोमवती अमावस्यापीपल
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हरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहित

हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।

व्रतहरतालिकातीज
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देवशयनी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है

देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द। देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य + विवाह आरम्भ, तुलसी विवाह। ~4 मास अन्तराल। पद्मपुराण: देवउठनी = 1000 अश्वमेध फल।

व्रत एवं पर्वदेवशयनीदेवउठनी
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संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखें

संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।

व्रतसंकष्टीचतुर्थी
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प्रदोष व्रत कैसे रखें शिव पूजा विधि सहित

प्रदोष: त्रयोदशी (दोनों पक्ष)। दिनभर उपवास → प्रदोष काल (सूर्यास्त + ~2.5 घंटे) में शिवलिंग अभिषेक + बिल्वपत्र + 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार। सोम प्रदोष = अत्यन्त शुभ, शनि प्रदोष = शनि दोष निवारण। शिव पुराण में माहात्म्य।

व्रतप्रदोषशिव
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निर्जला एकादशी व्रत कैसे रखें?

निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (भीमसेनी)। सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जल भी वर्जित। विष्णु पूजा + जप + रात्रि जागरण। द्वादशी में पारण (तुलसी जल → भोजन)। जलदान-पंखा-छाता दान। फल = 24 एकादशियों बराबर। सबसे कठोर व्रत।

व्रत विधिनिर्जला एकादशीभीमसेनी एकादशी
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व्रत उपवास विधि — प्रश्नोत्तर

व्रत उपवास विधि से सम्बन्धित 80+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप व्रत उपवास विधि के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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व्रत उपवास विधि: सनातन धर्म प्रश्नोत्तर — Pauranik