विस्तृत उत्तर
दीपावली केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पाँच दिनों तक चलने वाला भव्य पर्व-समूह है जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक मनाया जाता है।
पहला दिन — धनतेरस (धन त्रयोदशी): कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा होती है। धन्वंतरि इसी दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। सोना-चाँदी, बर्तन और धातु की वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है। संध्याकाल में यम देव के नाम पर दक्षिण दिशा में दीप जलाया जाता है।
दूसरा दिन — नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से 16 हजार स्त्रियों को मुक्त कराया था। सूर्योदय से पहले तेल मर्दन कर स्नान का विशेष महत्व है। इसे रूप चतुर्दशी और काली चौदस भी कहते हैं।
तीसरा दिन — दीपावली (मुख्य पर्व): कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे, और समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी इसी दिन प्रकट हुई थीं। लक्ष्मी-गणेश की विशेष पूजा प्रदोषकाल में होती है। घर-घर दीप जलाए जाते हैं।
चौथा दिन — गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। गाय की पूजा, गोवर्धन की परिक्रमा और 56 भोग (अन्नकूट) का आयोजन होता है।
पाँचवाँ दिन — भाई दूज (यम द्वितीया): कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन के लिए आए थे, तब से यह परंपरा बनी। बहनें भाई के माथे पर तिलक करती हैं और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं।




