विस्तृत उत्तर
दीपावली का पर्व 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' की भावना को साकार करता है। इस दिन दीयों को सही स्थानों पर रखना न केवल सौंदर्य की दृष्टि से बल्कि वास्तु और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य द्वार: सबसे पहले घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीये रखें। माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए प्रवेश द्वार को प्रकाशमान रखना अनिवार्य है।
तुलसी चौरा: घर के आँगन में तुलसी के पास दीया रखना अत्यंत शुभ है — तुलसी विष्णुप्रिया हैं और इनके पास दीपक जलाने से लक्ष्मी की कृपा होती है।
घर का मंदिर/पूजाघर: लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के सामने घी का दीपक रखें। यह सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।
रसोई: अन्न की देवी माँ अन्नपूर्णा का वास रसोई में माना जाता है — यहाँ भी दीपक रखना शुभ है।
घर के कोने और चौखट: घर के चारों कोनों में दीये रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। छत, खिड़कियाँ और सीढ़ियों पर भी दीपमाला सजाई जाती है।
पानी के स्रोत के पास: कुएं, नल या पानी की टंकी के पास दीया जलाना शुभ माना जाता है — इससे जल देवता प्रसन्न होते हैं।
दक्षिण दिशा में दीया: दीपावली पर दक्षिण दिशा में एक दीया रखना पितरों के लिए शुभ माना जाता है।
दीपक में घी या तेल का प्रयोग करें, मिट्टी के दीये ही सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। दीये बुझने न पाएं — उनकी बाती और तेल का ध्यान रखें।





